नई दिल्ली, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता
नेतन्याहू का परमाणु हथियार बयान ऐसे समय सामने आया है जब ईरान और इजरायल के बीच सैन्य तनाव चरम पर है। 28 फरवरी को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने मिलकर ईरान से उत्पन्न “अस्तित्व के खतरे” को समाप्त करने के लिए संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान के मौजूदा शासन को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
नेतन्याहू का परमाणु हथियार बयान क्षेत्रीय संघर्ष के बीच आया है, जहां हाल के हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ा दी है। इजरायली प्रधानमंत्री ने इसे केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक शांति से जुड़ा विषय बताया।
संयुक्त ऑपरेशन का दावा
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने मिलकर ईरान के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। उन्होंने ईरान के शासन को “आतंकवादी” करार देते हुए कहा कि यदि उसे परमाणु क्षमता प्राप्त हो गई तो यह पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख
- संयुक्त सैन्य कार्रवाई का दावा
- वैश्विक सुरक्षा का हवाला
- आने वाले दिनों को बताया चुनौतीपूर्ण
अमेरिका को धन्यवाद
नेतन्याहू का परमाणु हथियार बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विशेष उल्लेख किया गया। नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका का समर्थन और नेतृत्व इस कार्रवाई में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बताया।
इजरायली नागरिकों के लिए अपील
इजरायली प्रधानमंत्री ने अपने नागरिकों से सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आने वाले दिन “चुनौतीपूर्ण और अत्यंत महत्वपूर्ण” हो सकते हैं। लगातार सायरन और सुरक्षा अलर्ट के बीच सरकार ने लोगों से सतर्क रहने को कहा है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| बयान देने वाले | बेंजमिन नेतन्याहू |
| मुख्य मुद्दा | ईरान का परमाणु कार्यक्रम |
| सहयोगी देश | संयुक्त राज्य अमेरिका |
| संदेश | परमाणु हथियार की अनुमति नहीं |
क्षेत्रीय और वैश्विक असर
विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू का परमाणु हथियार बयान मध्य-पूर्व में संघर्ष को और तेज कर सकता है। यदि सैन्य कार्रवाई लंबी चली तो ऊर्जा बाजार, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और कूटनीतिक समीकरणों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है।
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