Thursday, January 15, 2026
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खामेनेई झुकने को तैयार नहीं! अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, बातचीत बंद—ट्रंप के हमले की धमकी से मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता

ईरान-अमेरिका तनाव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक राजनीति को हिलाकर रख दिया है। ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की कड़ी रुख के कारण दोनों देशों के बीच सभी प्रकार की बातचीत पूरी तरह बंद हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगातार धमकियों के बीच ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की जाएगी। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकोफ के बीच सभी संपर्क निलंबित कर दिए गए हैं। यह स्थिति ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों पर ट्रंप की हस्तक्षेप की धमकियों के बाद और गंभीर हो गई है। क्या अमेरिका ईरान पर हमला करने की तैयारी कर रहा है? यह सवाल अब वैश्विक चिंता का केंद्र बन चुका है।

तनाव की शुरुआत: प्रदर्शन और ट्रंप की धमकियां

ईरान में पिछले कुछ महीनों से विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जहां प्रदर्शनकारी सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं। इन प्रदर्शनों पर ईरानी सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कई बार बयान दिए हैं। उन्होंने कहा, “प्रदर्शनकारियों, अपना प्रदर्शन जारी रखो। आपकी मदद रास्ते में है।” ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक प्रदर्शनकारियों की “बेवजह हत्याएं” बंद नहीं होतीं, तब तक ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी गई हैं।

ट्रंप ने ईरान में हत्यारों और अत्याचारियों के नाम लिखकर रखने की अपील की और कहा कि उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इन बयानों ने ईरान को और उकसाया है। ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई ने सेनाओं को अलर्ट पर रखा है और अमेरिकी ठिकानों पर हमले की धमकी दी है। तेहरान ने स्पष्ट कहा कि अगर अमेरिका ने कोई सैन्य कार्रवाई की तो क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकाने निशाना बनेंगे।

बातचीत बंद: राजनयिक प्रयासों को झटका

पिछले एक साल से अमेरिका, यूरोपीय देशों और इजरायल के साथ मिलकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन बढ़ते तनाव ने सभी संभावनाओं को खत्म कर दिया है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी धमकियां राजनयिक प्रयासों को कमजोर करती हैं। दशकों पुराने परमाणु विवाद का राजनयिक समाधान खोजने के लिए होने वाली बैठकें रद्द कर दी गई हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ अमेरिकी कर्मचारियों को मिडिल ईस्ट में मुख्य अमेरिकी हवाई अड्डों को छोड़ने की सलाह दी गई है। यह स्थिति युद्ध की आशंका को और मजबूत कर रही है। ट्रंप के बयानों से ईरान में प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ा है, लेकिन ईरानी सरकार ने दमन की नीति तेज कर दी है।

भारत की चिंता: नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह

इस तनाव का असर भारत पर भी पड़ा है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एडवाइजरी जारी कर अपने नागरिकों को त्वरित ईरान छोड़ने की सलाह दी है। MEA ने कहा कि ईरान में मौजूद भारतीय सावधानी बरतें और विरोध प्रदर्शन या रैलियों से दूर रहें। साथ ही, ईरान में भारतीय दूतावास से संपर्क बनाए रखने और जरूरी कागजात तैयार रखने को कहा गया है।

भारत-ईरान के बीच मजबूत आर्थिक संबंध हैं, लेकिन बढ़ते तनाव से व्यापार और नागरिकों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। भारत ने हमेशा शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की है, लेकिन अमेरिका-ईरान विवाद में संतुलित रुख अपनाना चुनौतीपूर्ण है।

वैश्विक प्रतिक्रियाएं: दुनिया की चुप्पी और चिंता

इस घटनाक्रम पर वैश्विक प्रतिक्रियाएं मिश्रित हैं। रूस और चीन ने अमेरिकी धमकियों की निंदा की है, जबकि यूरोपीय संघ ने संयम की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने भी तनाव कम करने की मांग की है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ट्रंप की नीति ने मिडिल ईस्ट को फिर से युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है।

ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि हमला हुआ तो जवाबी कार्रवाई होगी। खामेनेई की कड़ी रुख से स्पष्ट है कि ईरान झुकने को तैयार नहीं। क्या यह विवाद युद्ध में बदल जाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की धमकियां चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन अगर बात आगे बढ़ी तो वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

निष्कर्ष: शांति की जरूरत

अमेरिका-ईरान तनाव वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा है। दोनों देशों की बातचीत बंद होने से समाधान की उम्मीद कम हो गई है। भारत जैसे देशों को अपनी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ राजनयिक प्रयासों से तनाव कम करने में भूमिका निभानी चाहिए। ट्रंप की आक्रामक नीति और खामेनेई की अडिगता से मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा बढ़ गया है। दुनिया को एकजुट होकर शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में काम करना होगा, अन्यथा परिणाम भयावह होंगे।

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