ईरान की नई रणनीति से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया, तेल-गैस कीमतों में जबरदस्त उछाल

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नई दिल्ली/डेस्क | वेब वार्ता

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने ऐसी रणनीति अपनाई है, जिसने युद्ध को केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रखा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर दिया है। इजरायल के साथ जारी तनाव के दौरान ईरान ने सैन्य ठिकानों के बजाय तेल और गैस आपूर्ति केंद्रों को निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है। इस रणनीति का सीधा असर दुनिया भर में ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर देखने को मिल रहा है।

ऊर्जा केंद्रों पर हमले से वैश्विक सप्लाई प्रभावित

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग का दबाव बनाने के लिए उपयोग किया, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। इसके अलावा कतर के रस लाफान इंडस्ट्रीज सिटी, जो दुनिया का सबसे बड़ा गैस केंद्र है, को निशाना बनाया गया। यहां से वैश्विक गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा आता है। हमले में कई मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से कुछ को रोका गया, लेकिन एक मिसाइल प्लांट पर लगने से भारी नुकसान हुआ।

प्रमुख ऊर्जा केंद्रों पर असर

स्थानसुविधामहत्व
कतर (रस लाफान)गैस निर्यात केंद्रदुनिया की ~20% गैस सप्लाई
यूएई (हबशान)गैस कॉम्प्लेक्स6.1 अरब क्यूबिक फीट/दिन उत्पादन
सऊदी अरब (रस तनुरा)तेल रिफाइनरी5.5 लाख बैरल/दिन प्रोसेसिंग

यूएई के हबशान गैस कॉम्प्लेक्स को भी बंद करना पड़ा, जो देश की करीब 60 प्रतिशत गैस जरूरत पूरी करता है। वहीं सऊदी अरब में भी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए रिफाइनरियों को निशाना बनाने की कोशिश की गई।

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दबाव से तेल सप्लाई बाधित
  • गैस प्लांट और रिफाइनरी पर सीधे हमले
  • ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में भारी अस्थिरता

तेल-गैस कीमतों में तेज उछाल, वैश्विक असर

सूचकस्थिति
कच्चा तेल$112 प्रति बैरल से अधिक
अमेरिका डीजल$5 प्रति गैलन से अधिक
यूरोप गैस कीमत~70% वृद्धि
एशिया LNG~88% वृद्धि

इन हमलों के बाद वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। इसका असर अमेरिका, यूरोप और एशिया तक पहुंचा है। विशेष रूप से भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश, जो आयातित ऊर्जा पर निर्भर हैं, इस संकट से प्रभावित हो सकते हैं।

भारत समेत एशियाई देशों पर बढ़ता दबाव

भारत अपनी गैस जरूरत का बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है, जिससे इस संकट का असर घरेलू ऊर्जा बाजार और महंगाई पर पड़ सकता है। कई देशों में गैस का भंडार केवल 9 से 11 दिनों तक सीमित रह गया है। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, क्योंकि उनके पास वैकल्पिक आपूर्ति के सीमित विकल्प हैं।

निष्कर्ष

ईरान की यह रणनीति केवल युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर रही है। ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख केंद्रों पर हमले से महंगाई, उत्पादन लागत और वैश्विक व्यापार पर व्यापक असर पड़ सकता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो दुनिया को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।


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