मिडिल ईस्ट युद्ध: ईरान ने ठुकराया ट्रंप का प्रस्ताव, 5 शर्तों पर अड़ा तेहरान

ट्रंप की पहल पर ईरान का सख्त रुख

तेहरान/वॉशिंगटन, 26 मार्च (वेब वार्ता)। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीतिक पहल कमजोर पड़ती नजर आ रही है। ईरान ने अमेरिका की शर्तों पर बातचीत से साफ इनकार कर दिया है और स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध का अंत उसकी शर्तों पर ही होगा।

अमेरिका की 15 शर्तों को किया खारिज

अमेरिका ने ईरान के सामने 15-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव रखा था, जिसमें परमाणु सुविधाओं को खत्म करने, यूरेनियम भंडार बाहर भेजने और परमाणु हथियार न बनाने जैसी शर्तें शामिल थीं। हालांकि ईरान ने इन सभी शर्तों को खारिज कर दिया और इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ बताया।

ईरान की 5 शर्तें, तभी रुकेगी जंग

ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए पांच स्पष्ट शर्तें रखी हैं। इनमें दुश्मन की आक्रामकता पूरी तरह रोकना, भविष्य में हमले न होने की गारंटी, युद्ध नुकसान का मुआवजा, सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अधिकार की अंतरराष्ट्रीय मान्यता शामिल है।

ट्रंप पर भरोसा नहीं, ईरान का आरोप

ईरान ने साफ कहा है कि उसे ट्रंप के दावों पर भरोसा नहीं है। ईरानी सेना के प्रवक्ता ने ट्रंप के बातचीत के दावों को झूठा बताया और कहा कि अमेरिका ताकत के बल पर समझौता थोपना चाहता है। ईरान का कहना है कि वह अपनी रणनीति के तहत युद्ध जारी रखेगा और किसी दबाव में नहीं आएगा।

लगातार हमलों से बढ़ा वैश्विक संकट

इजरायल और ईरान के बीच लगातार हमलों से हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। इस संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। हालांकि भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में तेल और गैस की कोई कमी नहीं होगी और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

अमेरिका बढ़ा रहा सैन्य दबाव

मिडिल ईस्ट में अमेरिका अपनी सैन्य ताकत लगातार बढ़ा रहा है। हजारों सैनिकों की तैनाती के साथ फाइटर जेट और मरीन यूनिट्स को भी भेजा जा रहा है। रक्षा मंत्री की सख्त चेतावनी से साफ है कि अमेरिका दबाव की रणनीति अपनाकर ईरान को झुकाना चाहता है।

डबल क्रॉस के आरोपों में घिरे ट्रंप

ट्रंप पर डबल क्रॉस के आरोप भी लग रहे हैं। एक ओर वह बातचीत की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर हमले जारी हैं। सैन्य गतिविधियां कम नहीं हुई हैं और इससे ईरान का अविश्वास और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति में युद्धविराम की राह फिलहाल मुश्किल नजर आ रही है।

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