तेहरान, अंतरराष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
ईरान में पिछले कई हफ्तों से जारी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार की ओर से गंभीर आरोप सामने आए हैं। 15 जनवरी 2026 को ईरान के रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल अजीज नसीरजादे ने राज्य मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया कि देश में भड़की हिंसा के पीछे विदेशी ताकतों की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका, इजरायल और कुछ पश्चिमी देशों ने ईरान को अस्थिर करने के लिए पैसे, हथियार और लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराया। रक्षा मंत्री के अनुसार, इन प्रदर्शनों को जानबूझकर हिंसक रूप दिया गया ताकि देश में अराजकता फैलाई जा सके।
विदेशी साजिश और कोऑर्डिनेशन का आरोप
रक्षा मंत्री अजीज नसीरजादे ने कहा कि ईरानी खुफिया एजेंसियों के पास ऐसे ठोस सबूत हैं, जिनसे पता चलता है कि विदेशी खुफिया एजेंसियों ने क्षेत्रीय देशों में बैठकों के जरिए ईरान में अशांति फैलाने की रणनीति बनाई। उनके अनुसार, इन बैठकों में बजट बढ़ाने, अलगाववादी नेटवर्क को सक्रिय करने और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की योजनाएं तय की गईं। मंत्री ने दावा किया कि यह एक संगठित प्रयास था, जिसका उद्देश्य केवल विरोध नहीं बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करना था।
हिंसा के लिए तय की गई कीमतें
इंटरव्यू में रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि हिंसक गतिविधियों के लिए बाकायदा “रेट कार्ड” तय किया गया था। उनके अनुसार, एक संदिग्ध व्यक्ति को 900 मिलियन तोमन (लगभग 6,500 अमेरिकी डॉलर) दिए गए, ताकि वह हत्याएं करे और अशांति फैलाए।
- किसी व्यक्ति की हत्या के लिए 500 मिलियन तोमन
- कार जलाने के लिए 200 मिलियन तोमन
- पुलिस स्टेशन को आग लगाने के लिए 80 मिलियन तोमन
- छोटी अव्यवस्था फैलाने वाले कृत्य के लिए 15 मिलियन तोमन
धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक प्रतीकों पर हमले
नसीरजादे ने कहा कि हालिया घटनाओं में कुरान जलाने, मस्जिदों और धार्मिक स्थलों पर हमलों की घटनाएं यह साबित करती हैं कि ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं थे। उनके अनुसार, ऐसे कृत्य सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए किए गए, ताकि स्थिति और अधिक विस्फोटक हो सके। सरकार का कहना है कि ये गतिविधियां आजीविका या आर्थिक मांगों से नहीं, बल्कि सुरक्षा और आतंकी उद्देश्यों से जुड़ी थीं।
ड्रग्स का इस्तेमाल और आंतरिक हत्याओं के आरोप
रक्षा मंत्री ने यह भी दावा किया कि कुछ हिंसक तत्वों को सिंथेटिक और इंडस्ट्रियल ड्रग्स दिए गए, ताकि वे अत्यधिक हिंसा पर उतर आएं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में गिरोह के नेताओं ने अपने ही सदस्यों को नजदीक से गोली मारकर मौत को अंजाम दिया, ताकि जनता में गुस्सा भड़काया जा सके। उनके मुताबिक, लगभग 60 प्रतिशत मौतें सिर पर वार से हुईं, जबकि कई अन्य मामलों में चाकू, गला घोंटने या ड्रग ओवरडोज का इस्तेमाल किया गया।
निष्कर्ष: विरोध या विदेशी साजिश?
ईरान सरकार का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए प्रदर्शन महंगाई, मुद्रा रियाल की गिरावट और आर्थिक संकट के खिलाफ थे। जहां सरकार इन्हें विदेशी साजिश और आतंकी गतिविधि बता रही है, वहीं विपक्षी और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में सुरक्षा बलों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए जा रहे हैं। इंटरनेट ब्लैकआउट और सूचना नियंत्रण के बीच सच्चाई को लेकर सवाल बने हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन आरोपों को किस तरह से परखा जाता है और ईरान की आंतरिक स्थिति किस दिशा में जाती है।
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