नई दिल्ली, इंटरनेशनल डेस्क | वेब वार्ता
वैश्विक तकनीकी और सामरिक संतुलन के बदलते परिदृश्य में भारत ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अमेरिका के नेतृत्व वाले Pax Silica गठबंधन में शामिल होकर भारत ने सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रणनीतिक संसाधनों के क्षेत्र में अपनी भूमिका को और अधिक मजबूत कर लिया है। यह पहल सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद सप्लाई चेन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मित्र देशों के बीच तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है।
भारत की इस भागीदारी को न केवल तकनीकी दृष्टि से, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर भी एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे देश को वैश्विक चिप निर्माण और डिजिटल इकोसिस्टम में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
क्या है Pax Silica पहल?
Pax Silica अमेरिका द्वारा शुरू किया गया एक बहुपक्षीय तकनीकी गठबंधन है, जिसका मुख्य उद्देश्य सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ मिनरल्स और AI से जुड़े महत्वपूर्ण संसाधनों की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना है।
वर्तमान में चीन के पास कई रेयर अर्थ मिनरल्स और चिप निर्माण से जुड़े कच्चे माल पर बड़ा नियंत्रण है, जिसके कारण वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था असंतुलित हो रही थी। इसी चुनौती से निपटने के लिए Pax Silica गठबंधन की नींव रखी गई।
दिल्ली में हुआ ऐतिहासिक समझौता
India joins Pax Silica 🇮🇳🤝🇺🇸
Securing silicon supply chain, advancing semiconductor manufacturing. pic.twitter.com/5I117ZPfHs
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 20, 2026
20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम के दौरान Pax Silica घोषणापत्र पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर भारत को विशेष रणनीतिक साझेदार का दर्जा दिया गया।
कार्यक्रम में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, अमेरिका के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर मौजूद रहे।
भारत को क्या होंगे प्रत्यक्ष लाभ?
Pax Silica में शामिल होने के बाद भारत को कई स्तरों पर लाभ मिलेगा। यह साझेदारी देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई दिशा देगी।
- उच्च गुणवत्ता वाली चिप निर्माण तकनीक तक पहुंच
- सप्लाई चेन में विविधता और स्थिरता
- AI और हाई-टेक रिसर्च में सहयोग
- वैश्विक टेक्नोलॉजी मानकों में भागीदारी
- विदेशी निवेश में वृद्धि
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भारत की “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” योजनाओं को सीधा लाभ मिलेगा।
सेमीकंडक्टर मिशन को मिलेगा नया बल
भारत पहले ही राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन के तहत चिप निर्माण को बढ़ावा दे रहा है। Pax Silica के साथ सहयोग से इस मिशन को अंतरराष्ट्रीय तकनीकी समर्थन मिलेगा।
अब भारत में स्थापित होने वाले फेब प्लांट्स को बेहतर कच्चा माल, डिजाइन सपोर्ट और वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच मिल सकेगी।
AI और रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग
यह गठबंधन केवल वाणिज्यिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव रक्षा और साइबर सुरक्षा तक भी जाएगा।
AI आधारित निगरानी प्रणाली, डिफेंस चिप्स और डेटा सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में भारत को वैश्विक सहयोग मिलेगा। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा भी मजबूत होगी।
अमेरिकी राजदूत और सुंदर पिचाई की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत की भागीदारी केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत को भविष्य का टेक हब बताया।
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भी इस साझेदारी को डिजिटल युग में सहयोग का नया मॉडल बताया और भारत की तकनीकी क्षमता की सराहना की।
Pax Silica में शामिल प्रमुख देश
इस गठबंधन में कई विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं —
- संयुक्त राज्य अमेरिका
- ऑस्ट्रेलिया
- ग्रीस
- इज़राइल
- जापान
- दक्षिण कोरिया
- कतर
- सिंगापुर
- यूनाइटेड किंगडम
- संयुक्त अरब अमीरात
- भारत
मुख्य तथ्यों का सार
| विषय | विवरण |
|---|---|
| गठबंधन | Pax Silica |
| नेतृत्व | संयुक्त राज्य अमेरिका |
| भारत की स्थिति | रणनीतिक साझेदार |
| मुख्य क्षेत्र | सेमीकंडक्टर, AI, रक्षा |
| लक्ष्य | सुरक्षित सप्लाई चेन |
भविष्य पर संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि Pax Silica में भारत की भागीदारी अगले एक दशक में देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।
इससे — स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलेगा, नई नौकरियां पैदा होंगी, तकनीकी निर्यात बढ़ेगा और भारत वैश्विक डिजिटल शक्ति के रूप में उभरेगा।
निष्कर्ष
अमेरिका-नेतृत्व वाले Pax Silica गठबंधन में भारत की भागीदारी देश के तकनीकी, आर्थिक और रणनीतिक भविष्य के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह कदम भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर और AI इकोसिस्टम में एक निर्णायक भूमिका दिलाएगा।
आने वाले वर्षों में यह साझेदारी भारत को केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार का नेतृत्वकर्ता बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करेगी।
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