नूक, अंतरराष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर बार-बार दिए जा रहे बयानों पर अब वहां की सरकार ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। ग्रीनलैंड की मंत्री नाजा नतानिएल्सन ने साफ शब्दों में कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा नहीं बनना चाहता और वहां के लोग अपने भविष्य का फैसला स्वयं करना चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हालिया बयानबाजी से ग्रीनलैंड के लोगों में यह भावना पैदा हो रही है कि एक पुराने और भरोसेमंद साथी ने उन्हें धोखा दिया है।
‘ग्रीनलैंड अपना भविष्य खुद तय करेगा’
Greenland’s Energy Minister Naaja Nathanielsen:
We have no intentions of becoming American.
We are quite happy with being part of the Kingdom of Denmark. pic.twitter.com/DynwZDapl6
— Clash Report (@clashreport) January 13, 2026
नाजा नतानिएल्सन ने कहा कि ग्रीनलैंड की जनता आत्मनिर्णय के अधिकार में विश्वास रखती है और किसी भी तरह का बाहरी दबाव स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड न तो बिकाऊ है और न ही किसी देश का विस्तारवादी हिस्सा बनने के लिए तैयार है। मंत्री के मुताबिक, ग्रीनलैंड की पहचान, संस्कृति और राजनीतिक स्वायत्तता उसके लोगों के लिए सर्वोपरि है।
अमेरिका से रिश्ते अहम, लेकिन सीमाएं स्पष्ट
ग्रीनलैंड की मंत्री ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ उनके रिश्ते ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं। ग्रीनलैंड ने लंबे समय तक अमेरिकी निवेश और सहयोग का स्वागत किया है। आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी को लेकर सहयोग की आवश्यकता से भी उन्होंने इनकार नहीं किया, लेकिन उन्होंने साफ किया कि इसका यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि ग्रीनलैंड अमेरिका के अधीन आ जाए।
- ग्रीनलैंड अमेरिका के साथ सहयोग को जरूरी मानता है
- आर्कटिक सुरक्षा पर साझेदारी संभव, विलय नहीं
- आत्मनिर्णय और स्वायत्तता से कोई समझौता नहीं
‘भरोसेमंद साथी से धोखा महसूस हो रहा’
एक इंटरव्यू में नाजा नतानिएल्सन ने कहा कि मौजूदा हालात ग्रीनलैंड के लोगों के लिए भ्रम और चिंता पैदा करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि जिस बड़े साझेदार पर वर्षों से भरोसा किया गया, उसी की ओर से ऐसे बयान आना निराशाजनक है। मंत्री के अनुसार, यह केवल राजनीतिक मामला नहीं, बल्कि भावनात्मक और भरोसे से जुड़ा मुद्दा भी बन गया है।
आर्कटिक में नाटो और यूरोप की मौजूदगी का समर्थन
ग्रीनलैंड की मंत्री ने बताया कि वहां के अधिकांश नागरिक आर्कटिक क्षेत्र में यूरोपीय देशों और नाटो की मजबूत मौजूदगी के पक्षधर हैं। उनका मानना है कि यह क्षेत्र केवल सैन्य दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा, पर्यावरण संतुलन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील है।
ग्रीनलैंड पर हमला हुआ तो बदलेगी वैश्विक व्यवस्था
नाजा नतानिएल्सन ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कभी ग्रीनलैंड पर सैन्य दबाव या हमला किया गया, तो इसके दूरगामी अंतरराष्ट्रीय परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकता है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।
निष्कर्ष: रणनीतिक अहमियत, लेकिन स्वायत्तता सर्वोपरि
ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है और उसकी भौगोलिक स्थिति उसे वैश्विक राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखता रहा है, लेकिन ग्रीनलैंड की सरकार ने साफ कर दिया है कि रणनीतिक महत्व के बावजूद वह अपनी राजनीतिक पहचान और स्वतंत्र निर्णय क्षमता से कोई समझौता नहीं करेगा। आने वाले समय में यह मुद्दा अमेरिका, डेनमार्क और यूरोप के रिश्तों को नई दिशा दे सकता है।
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