Monday, February 2, 2026
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ट्वीट के लिए 34 साल की सजा का सामना कर रही डॉक्टरेट का छात्रा की सजा माफ हुई: कार्यकर्ता

दुबई, (वेब वार्ता)। ब्रिटेन के लीड्स विश्वविद्यालय में शोधार्थी सऊदी की एक छात्रा को ट्विटर पर उसकी गतिविधि के लिए सऊदी अरब में 34 साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन अब उसकी सजा माफ कर दी गई है। एक अधिकार समूह ने सोमवार को यह जानकारी दी।

समूह ने कहा कि दो बच्चों की मां सलमा अल-शहाब को उनके ट्वीट के लिए 2022 में 34 साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

लंदन स्थित सऊदी अधिकार समूह, ‘एएलक्यूएसटी’ ने सलमा की सजा की माफी की घोषणा की।

जनवरी में एएलक्यूएसटी और अन्य अधिकार समूहों ने कहा कि सलमा की सजा घटाकर चार साल कर दी गई है, साथ ही चार साल की अतिरिक्त सजा निलंबित कर दी गई है।

समूह ने कहा, ‘‘सलमा को अब पूरी आजादी दी जानी चाहिए, जिसमें उन्हें पढ़ाई पूरी करने के लिए यात्रा करने का अधिकार भी शामिल है।’’

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ ने भी सलमा की सजा माफ किए जाने सूचना दी।

एमनेस्टी में पश्चिम एशिया के अनुसंधानकर्ता दाना अहमद ने कहा, ‘‘उन्होंने 300 दिन एकांत कारावास में बिताया और उन्हें कानूनी मदद भी देने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद उन्हें बार-बार आतंकवाद के आरोपों में दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने महिला अधिकारों के समर्थन में ट्विट किया और सऊदी महिला अधिकार कार्यकर्ता के ट्विट को रीट्विट किया।’’

अमेरिका स्थित ‘मिडल ईस्ट डेमोक्रेसी सेंटर’ और ‘फ्रीडम हाउस’ ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।

सऊदी अरब ने उसकी रिहाई के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। सऊदी अधिकारियों ने एसोसिएटेड प्रेस की टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया।

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