दुनिया का सबसे कम भ्रष्ट देश डेनमार्क को घोषित किया

लंदन, (वेब वार्ता)। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, डेनमार्क को लगातार सातवें साल दुनिया का सबसे कम भ्रष्ट देश घोषित किया गया है। हाल ही जारी रिपोर्ट में इस यूरोपीय देश ने करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (सीपीआई) में 90 अंक हासिल कर टॉप स्थान बरकरार रखा है। इस इंडेक्स में 180 देशों को 0 से 100 के बीच अंक दिए जाते हैं, जिसमें 0 अंक अत्यधिक भ्रष्ट और 100 अंक पूर्ण रूप से ईमानदार होने का संकेत देते हैं। डेनमार्क की इस सफलता का एक बड़ा कारण वहां के नागरिकों के बीच गहरा आपसी विश्वास है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 74 फीसदी डेनिश नागरिक मानते हैं कि दुनिया के अधिकतर लोग भरोसेमंद होते हैं। यहां लोग अनजान व्यक्तियों पर भी सहज विश्वास करते हैं। डेनमार्क में लोग घरों और दुकानों को बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के छोड़ देते हैं और लेन-देन में भी लिखित अनुबंध से अधिक आपसी सहमति को महत्व देते हैं। सरकारी संस्थाओं पर भी नागरिकों का मजबूत विश्वास है, जिससे वहां भ्रष्टाचार की संभावना बेहद कम हो जाती है। डेनमार्क की अर्थव्यवस्था भी इसकी ईमानदार छवि को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। यह देश यूरोप के सबसे अमीर देशों में से एक है, जहां सरकार नागरिकों को कई सुविधाएं उपलब्ध कराती है। यूनिवर्सिटी की पढ़ाई मुफ्त होती है, और छात्रों को आर्थिक सहायता भी मिलती है। देश में आय का अंतर भी बहुत कम है, जिससे समाज में आपसी विश्वास बढ़ता है। हालांकि, हाल के वर्षों में कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। घेटो पॉलिसी के तहत कुछ खास इलाकों में सख्त नियम लागू किए गए हैं, जिससे सामाजिक विभाजन की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा, हाल ही में कुछ राजनेताओं और पुलिस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह इंडेक्स केवल विशेषज्ञों और व्यापारियों की राय पर आधारित होता है, जबकि भ्रष्टाचार की वास्तविकता को मापने के लिए ठोस डेटा की जरूरत है। पश्चिमी देशों को हमेशा उच्च रैंकिंग मिलती है, जबकि विकासशील देशों को अधिक भ्रष्ट बताया जाता है।

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