नई दिल्ली, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता
India-Germany Relation:
भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। इसी कड़ी में जर्मनी के नए चांसलर फ्रेडरिक मर्ज सोमवार से तीन दिवसीय भारत दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अहमदाबाद में मुलाकात करेंगे और साबरमती आश्रम का भी दौरा करेंगे। जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन ने इसे दोनों देशों के बीच बढ़ती दोस्ती और गर्मजोशी का प्रतीक बताया। यह दौरा जर्मन विदेश नीति में भारत के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है।
अहमदाबाद में पीएम मोदी से मुलाकात और साबरमती आश्रम दौरा
जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद चांसलर मर्ज को अपने गृहनगर अहमदाबाद आने का निमंत्रण दिया है। यह निमंत्रण दोस्ती और गर्मजोशी भरे स्वागत का प्रतीक है, जिसकी चांसलर बहुत सराहना करते हैं। अहमदाबाद में दोनों नेता रक्षा, सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, स्किलिंग और बदलती भू-राजनीति जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। साबरमती आश्रम दौरा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव को और मजबूत करेगा।
बेंगलुरु में विज्ञान और उद्योग का दौरा
अहमदाबाद के बाद चांसलर मर्ज 13 जनवरी को बेंगलुरु जाएंगे। वहां वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) और जर्मन कंपनी बॉश के कैंपस का दौरा करेंगे। उनके साथ एक बड़ा बिजनेस डेलीगेशन भी होगा, जिसमें 25 बड़ी और मध्यम आकार की जर्मन कंपनियों के चीफ एग्जीक्यूटिव शामिल हैं। यह दौरा भारत में जर्मन निवेश और तकनीकी सहयोग को नई गति देगा।
दोनों देशों के बीच बढ़ता कारोबार: 50 बिलियन डॉलर का आंकड़ा
भारत और जर्मनी के बीच सेवाओं और सामानों का लेन-देन लगातार बढ़ रहा है। पिछले साल तक दोनों के बीच ट्रेड वॉल्यूम 50 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। राजदूत एकरमैन ने कहा कि यह आंकड़ा जर्मनी के भारत के साथ गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। भारत में 2,000 से ज्यादा जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं, जबकि लगभग 750 भारतीय कंपनियों ने जर्मनी में निवेश किया है।
कारोबार काफी हद तक संतुलित है – सामान के मामले में जर्मनी थोड़ा फायदे में है, जबकि सेवाओं के मामले में भारत थोड़ा आगे है। एकरमैन ने बताया कि जर्मन कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी के साथ कारोबार में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। औसतन हर हफ्ते दो कंपनियां भारत में अपना कारोबार शुरू करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स से संपर्क करती हैं।
प्रमुख तथ्य एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| दौरा तिथि | सोमवार से (12-14 जनवरी 2026) |
| मुख्य मुलाकात | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से (अहमदाबाद) |
| अन्य दौरा | साबरमती आश्रम, IISc बेंगलुरु, बॉश कैंपस |
| साथ आएंगे | 25 जर्मन कंपनियों के CEO |
| द्विपक्षीय व्यापार | 50 बिलियन डॉलर (पिछले साल) |
| जर्मन कंपनियां भारत में | 2,000+ |
| भारतीय कंपनियां जर्मनी में | 750+ |
दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी: रक्षा से स्किलिंग तक
यह दौरा भारत-जर्मनी रिश्तों में नए अध्याय का सूचक है। दोनों देश रक्षा, सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी, शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी का व्यक्तिगत निमंत्रण और चांसलर मर्ज का अहमदाबाद दौरा दोनों नेताओं के बीच गहरी दोस्ती और विश्वास का प्रतीक है।
भारत-जर्मनी साझेदारी की नई ऊंचाई
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का भारत दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी और विश्वास का प्रमाण है। अहमदाबाद में पीएम मोदी से मुलाकात, साबरमती आश्रम दौरा और बेंगलुरु में विज्ञान-उद्योग केंद्रों का दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगा। 50 बिलियन डॉलर के व्यापार और बढ़ते निवेश से भारत-जर्मनी साझेदारी वैश्विक स्तर पर एक मजबूत धुरी बन रही है। यह दौरा ‘विकसित भारत’ और ‘विकसित जर्मनी’ की साझा परिकल्पना को नई गति देगा।




