Monday, January 26, 2026
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क़तर पर इसराइली हमले के खिलाफ अरब-इस्लामी शिखर सम्मेलन: एकजुटता और कार्रवाई की मांग

आपातकालीन अरब-इस्लामी शिखर सम्मेलन

दोहा, (वेब वार्ता)। क़तर की राजधानी दोहा में 15 सितंबर 2025 को अरब-इस्लामी आपातकालीन शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया, जो इसराइल के हालिया हमले के जवाब में बुलाया गया था। इस हमले में इसराइल ने 9 सितंबर को दोहा में हमास के नेताओं को निशाना बनाया, जिसमें पांच हमास सदस्यों और एक क़तरी सुरक्षा अधिकारी की मौत हो गई। इस सम्मेलन का उद्देश्य क़तर के साथ एकजुटता दिखाना और इसराइल की कार्रवाइयों की निंदा करना था।

क़तर के अमीर की कड़ी प्रतिक्रिया

क़तर के अमीर शेख तमीम बिन हमाद अल-थानी ने इसराइल के हमले को “बेशर्मी” करार देते हुए कहा कि यह हमला इसराइल के दावों को झुठलाता है कि उसका मकसद हमास के कब्जे में बंधकों को छुड़ाना है। उन्होंने कहा, “इसराइल का असली मकसद ग़ज़ा को रहने लायक नहीं छोड़ना है।” उन्होंने इस हमले को कूटनीति और शांति प्रयासों पर आघात बताया।

अरब-इस्लामी नेताओं की निंदा

सम्मेलन में अरब लीग और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के लगभग 60 सदस्य देशों के नेताओं और विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। नेताओं ने इसराइल के हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया और इसके लिए जवाबदेही की मांग की।

  • तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने कहा कि इसराइल ने क़तर के अलावा फिलिस्तीन, लेबनान, यमन, ईरान, और सीरिया पर हमले किए हैं। उन्होंने इसे “गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार” का नया स्तर बताया और OIC व अरब लीग के फैसलों को लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने इसराइल से संबंध तोड़ने की अपील की और हमले को “योजनाबद्ध कूटनीतिक हमला” करार दिया। उन्होंने इसराइली नेताओं के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत में मुकदमा चलाने की मांग की।

  • जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने इसराइल की कार्रवाइयों को टू-स्टेट समाधान के लिए बाधा बताया और कहा कि यह क्षेत्रीय शांति की संभावनाओं को नष्ट कर रहा है।

  • इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने हमले को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया और इसे ग़ज़ा में शांति प्रयासों को नष्ट करने की कोशिश करार दिया।

  • पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसराइल की संयुक्त राष्ट्र सदस्यता निलंबित करने की मांग का समर्थन किया और ग़ज़ा में “मानवता की कराह” को रोकने के लिए सामूहिक कार्रवाई की अपील की।

  • मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने हमले को क़तर की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, इसे पूरे अरब-इस्लामी जगत पर हमला करार दिया।

  • OIC महासचिव हुसैन ताहा ने इसराइल को जवाबदेह ठहराने और अरब-इस्लामी एकजुटता को मजबूत करने की बात कही।

  • अरब लीग महासचिव अहमद अबुल घैत ने इसराइल को “आतंकवाद” के लिए जिम्मेदार ठहराने और फिलिस्तीनी नरसंहार के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।

संयुक्त सैन्य बल की चर्चा

मिस्र ने नेटो जैसा संयुक्त सैन्य बल बनाने का प्रस्ताव पेश किया, जिसमें अरब लीग के 22 देश बारी-बारी से नेतृत्व करेंगे। मिस्र इस गठबंधन का पहला अध्यक्ष होगा। इस प्रस्ताव को 2015 में यमन संकट के दौरान भी उठाया गया था। क़तर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद बिन मोहम्मद अल-अंसारी ने बताया कि सम्मेलन में इसराइली हमले पर एक मसौदा प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जिसे रविवार को विदेश मंत्रियों की बैठक में तैयार किया गया था।

इसराइल और अमेरिका की प्रतिक्रिया

इसराइल ने दावा किया कि उसने हमले से पहले अमेरिका और क़तर को सूचित किया था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर इस हमले की आलोचना की और इसे अमेरिका-इसराइल हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने क़तर को आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसा हमला नहीं होगा।

इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने यरूशलम में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमास नेताओं को “कहीं भी छूट नहीं मिलेगी” और इसराइल अपनी सुरक्षा के लिए सीमाओं से परे कार्रवाई करेगा।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हमले को क़तर की संप्रभुता का “घोर उल्लंघन” बताया।

  • तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इसराइल के “अंधाधुंध हमले” क्षेत्र को आपदा की ओर ले जा सकते हैं।

  • अरब मीडिया ने हमले को “नई लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन” बताया और इसे शांति वार्ताओं पर हमला करार दिया।

निष्कर्ष

दोहा शिखर सम्मेलन ने इसराइल के खिलाफ अरब-इस्लामी देशों की एकजुटता को मजबूत किया। नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के लिए इसराइल को जवाबदेह ठहराने और संयुक्त सैन्य बल की स्थापना जैसे ठोस कदमों पर चर्चा की। यह सम्मेलन क्षेत्रीय स्थिरता और शांति के लिए एकजुट कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करता है।


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