नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क | वेब वार्ता
यूनियन बजट 2026 को लेकर इस बार रियल एस्टेट सेक्टर की निगाहें सरकार पर टिकी हुई हैं। 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट से बिल्डर्स, डेवलपर्स और निवेशकों को कई नीतिगत राहतों की उम्मीद है। खास तौर पर लंबे समय से चली आ रही मांग—रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा—को लेकर सेक्टर में सकारात्मक माहौल है। जानकारों का मानना है कि अगर इस दिशा में फैसला होता है, तो इससे हाउसिंग सेक्टर को नई गति मिल सकती है।
उद्योग का दर्जा क्यों है सबसे बड़ी मांग
रियल एस्टेट से जुड़े संगठनों और डेवलपर्स का कहना है कि उद्योग का दर्जा मिलने से उन्हें कम ब्याज दर पर लंबे समय के लोन उपलब्ध हो सकेंगे। इसके साथ ही बैंकों और संस्थागत निवेशकों से फंडिंग लेना आसान होगा। अभी इस सेक्टर को कई मामलों में सेवा या व्यापार के तौर पर देखा जाता है, जिससे फाइनेंसिंग की लागत बढ़ जाती है।
डेवलपर्स के अनुसार, यह मांग कई वर्षों से की जा रही है और अब बजट 2026 से उन्हें ठोस पॉलिसी सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जिससे सेक्टर में स्थिरता और भरोसा दोनों बढ़ेंगे।
जीडीपी और रोजगार में रियल एस्टेट की भूमिका
| पैरामीटर | वर्तमान स्थिति | भविष्य का अनुमान |
|---|---|---|
| जीडीपी में योगदान | करीब 7% | 2047 तक 15% |
| जुड़े हुए सेक्टर | 200+ | और विस्तार की संभावना |
| रोजगार सृजन | लाखों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष नौकरियां | तेजी से बढ़ने की उम्मीद |
मनीकंट्रोल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सिग्नेचर ग्लोबल (इंडिया) लिमिटेड के संस्थापक एवं चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल का कहना है कि रियल एस्टेट सेक्टर देश की जीडीपी में करीब 7 प्रतिशत का योगदान दे रहा है और इससे 200 से अधिक सहायक सेक्टर जुड़े हुए हैं।
उनका मानना है कि यदि इस क्षेत्र को उद्योग का दर्जा मिल जाता है, तो बड़ी वित्तीय संस्थाओं से फंडिंग आसान होगी। सही नीतिगत समर्थन मिलने पर वर्ष 2047 तक इसका योगदान 15 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
डेवलपर्स क्या चाहते हैं सरकार से
ट्राइबेका डेवलपर्स ग्रुप के सीईओ रजत खंडेलवाल के अनुसार, सेक्टर को ऐसी स्थायी और स्पष्ट नीतियों की जरूरत है, जिससे घर बनाने वालों और खरीदने वालों—दोनों को लाभ हो। उन्होंने कहा कि उद्योग का दर्जा मिलने से सस्ती पूंजी और लंबी अवधि के लोन उपलब्ध होंगे, जिससे प्रोजेक्ट प्लानिंग और निष्पादन बेहतर हो सकेगा।
सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम की मांग
रियल एस्टेट सेक्टर की एक और बड़ी मांग है सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम। डेवलपर्स का कहना है कि वर्तमान में विभिन्न विभागों से अलग-अलग मंजूरियां लेनी पड़ती हैं, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते हैं।
- सभी मंजूरियां एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर
- प्रोजेक्ट में देरी कम होने की उम्मीद
- सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता
उनका मानना है कि अगर सिंगल-विंडो सिस्टम लागू होता है, तो प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे और उपभोक्ताओं का भरोसा भी मजबूत होगा।
बजट 2026 से सेक्टर को क्या उम्मीदें
बजट 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर को नीतिगत स्पष्टता, सस्ती फंडिंग और डिजिटल सुधारों की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार अगर इस सेक्टर को मजबूती देती है, तो इसका सीधा असर हाउसिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार पर पड़ेगा।
निष्कर्ष
यूनियन बजट 2026 रियल एस्टेट सेक्टर के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। उद्योग का दर्जा, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और आसान फंडिंग जैसे कदम न केवल डेवलपर्स को राहत देंगे, बल्कि घर खरीदने वालों के लिए भी आवास को अधिक सुलभ बना सकते हैं। अब देखना होगा कि सरकार बजट में इन अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरती है।
👉 बजट, रियल एस्टेट और बिजनेस से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए हमारे व्हाट्सएप्प चैनल को फॉलो करें
ये भी पढ़ें: 🌍 भारत–ईयू की अहम ‘मदर ऑफ़ ऑल डील्स’: यूरोपीय कारों पर टैरिफ़ घटेगा, फ्री ट्रेड ज़ोन से दो अरब लोगों को लाभ








