नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क | वेब वार्ता
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 750 अंकों से अधिक गिर गया, जबकि निफ्टी 50 भी करीब 1 प्रतिशत फिसल गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली, बजट से पहले की सतर्कता और बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों की धारणा कमजोर कर दी।
दिन के अंत में सेंसेक्स 770 अंक या 0.94% टूटकर 81,537.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी-50 241 अंक या 0.95% गिरकर 25,048.65 पर आ गया।
शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण हैं —
- 1. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली (FII Selling): जनवरी 2026 के शुरुआती हफ्तों में एफआईआई द्वारा भारी पैमाने पर शेयरों की बिकवाली की गई है।
- 2. भू-राजनीतिक तनाव: मध्य पूर्व और एशिया में जारी अस्थिरता ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बनाया है।
- 3. केंद्रीय बजट से पहले सतर्कता: निवेशक बजट घोषणाओं से पहले नई पोजिशन नहीं ले रहे हैं।
- 4. कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजों में अनिश्चितता: कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर संदेह बना हुआ है।
इन सभी कारणों ने मिलकर भारतीय बाजार में बिकवाली का माहौल बना दिया।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सबसे ज्यादा चोट
शुक्रवार की गिरावट में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर सबसे अधिक असर पड़ा। बीएसई मिडकैप इंडेक्स में लगभग 1.6% और स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.2% की भारी गिरावट दर्ज की गई।
इससे स्पष्ट संकेत मिला कि निवेशक जोखिम वाले शेयरों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों जैसे ब्लूचिप या डिफेंसिव सेक्टर्स की ओर रुख कर रहे हैं।
6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान
बाजार की इस भारी गिरावट से निवेशकों को एक ही दिन में लगभग ₹6 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले सत्र में ₹458.5 लाख करोड़ था, जो घटकर लगभग ₹452 लाख करोड़ पर आ गया।
यानी कुछ घंटों के कारोबार में निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹6 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई — जो इस साल की सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट में से एक है।
निवेशक हुए सतर्क, एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक संकेत स्पष्ट नहीं होते और केंद्रीय बजट को लेकर अनिश्चितता खत्म नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के एक विश्लेषक ने कहा, “एफआईआई की बिकवाली और वैश्विक मंदी के डर ने शॉर्ट टर्म में बाजार को कमजोर बना दिया है। निवेशकों को फिलहाल क्वालिटी स्टॉक्स में ही टिके रहना चाहिए।”
कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा गिरे?
- 📉 बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में 1.2% तक की गिरावट।
- 🏭 मेटल और एनर्जी शेयरों में 2% तक की कमजोरी।
- 💻 आईटी सेक्टर हल्का कमजोर रहा, लेकिन डिफेंसिव स्टॉक्स में खरीदारी देखी गई।
विश्लेषकों का मानना है कि बजट से पहले लार्जकैप शेयरों में थोड़ी स्थिरता आ सकती है, लेकिन मिडकैप-स्मॉलकैप में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।
निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो?
एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि निवेशक इस गिरावट के दौरान पैनिक सेलिंग से बचें और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर फोकस करें। दीर्घकालिक निवेशक इस गिरावट को खरीदारी का अवसर भी मान सकते हैं, लेकिन किसी भी निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना जरूरी है।
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