नई दिल्ली, संसद डेस्क | वेब वार्ता
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उससे उत्पन्न हालात पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में विस्तृत बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है।
ऊर्जा संकट और भारत की चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट पैदा हुआ है। पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत हर संभव प्रयास कर रहा है कि इन आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति बाधित न हो।
भारत की रणनीति और तैयारी
| क्षेत्र | सरकारी रणनीति |
|---|---|
| ऊर्जा आपूर्ति | 41 देशों से आयात, स्रोतों का विविधीकरण |
| भंडारण | क्रूड ऑयल और गैस का पर्याप्त स्टॉक |
| एलपीजी उत्पादन | घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर |
| शिपिंग और लॉजिस्टिक्स | शिपबिल्डिंग और ओवरहॉलिंग में तेजी |
भारतीयों की सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयास
पीएम मोदी ने बताया कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भारत ने ईरान, अमेरिका और इजरायल समेत कई देशों से संपर्क साधा है और तनाव कम करने के लिए लगातार संवाद जारी है। होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए भी बातचीत हो रही है, क्योंकि यह भारत के व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।
- करीब 1 करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रह रहे हैं
- ईरान, अमेरिका और इजरायल से लगातार संपर्क
- होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर चर्चा जारी
होर्मुज स्ट्रेट पर चिंता जताई
प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में भारत के कई जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल मौजूद हैं। उन्होंने इस मार्ग को बाधित किए जाने को अस्वीकार्य बताया और कहा कि वैश्विक व्यापार के लिए इसका खुला रहना जरूरी है।
जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग पर सख्ती
पीएम मोदी ने राज्यों से अपील की कि वे जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग पर कड़ी नजर रखें। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार राज्यों के संपर्क में है और किसी भी तरह की कृत्रिम कमी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक स्तर पर गंभीर चुनौतियां पैदा की हैं, लेकिन भारत सरकार इनसे निपटने के लिए बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। ऊर्जा सुरक्षा, भारतीयों की सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए स्थिति को संतुलित रखने की कोशिश की जा रही है।
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