ईरान-इज़रायल तनाव का असर, भारत के निर्यात और उद्योगों पर संकट

नई दिल्ली, 03 अप्रैल (वेब वार्ता)। ईरान-इज़रायल में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस क्षेत्र को जाने वाला भारत का बड़ा हिस्सा अब लंबे और महंगे रास्तों से भेजा जा रहा है, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ गए हैं।

मंत्रालय ने बताया कि इस स्थिति का असर कई प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ रहा है, जिससे निर्यात, उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है।

कृषि और खाद्य निर्यात पर असर

पश्चिम एशिया भारतीय बासमती चावल, समुद्री उत्पाद और ताजे फलों का बड़ा बाजार है। मौजूदा हालात में हवाई और समुद्री भाड़ा बढ़ने से निर्यात महंगा हो गया है।

ताजे फल-सब्जियों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है, जबकि बासमती के भुगतान चक्र भी प्रभावित हो रहे हैं।

इंजीनियरिंग और धातु उद्योग प्रभावित

लोहे, स्टील और मशीनरी जैसे इंजीनियरिंग उत्पादों की सप्लाई बाधित हो रही है। जहाजों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे समय बढ़ने के साथ अतिरिक्त शुल्क भी लग रहा है।

एलपीजी और पीएनजी आपूर्ति पर दबाव के कारण उत्पादन इकाइयों की लागत बढ़ गई है।

रत्न-आभूषण कारोबार पर दोहरा असर

खाड़ी देश भारतीय आभूषण उद्योग के लिए प्रमुख बाजार हैं। मौजूदा हालात में न तो निर्यात सुचारु रूप से हो पा रहा है और न ही सोने व कच्चे हीरे की आपूर्ति सही तरीके से हो रही है।

इससे उद्योग में उत्पादन और बिक्री दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव

भारत के लिए कच्चे तेल और गैस का प्रमुख मार्ग प्रभावित होने से एलपीजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि सरकार ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देकर आपूर्ति बनाए रखने की बात कही है।

इसके बावजूद औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की कमी का असर साफ दिख रहा है।

रसायन और दवा उद्योग संकट में

पेट्रोकेमिकल्स की आपूर्ति बाधित होने से दवा, कपड़ा और पैकेजिंग उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से छोटे और मध्यम उद्योगों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।

दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे तत्वों की कमी से उत्पादन धीमा पड़ सकता है।

सरकार ने उठाए कदम

स्थिति को देखते हुए सरकार ने निर्यातकों को राहत देने के लिए निर्यात ऋण गारंटी कवरेज बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि भुगतान से जुड़े जोखिम को कम किया जा सके।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबे समय तक बना रहा तो इसका असर व्यापक रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।

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