Wednesday, February 11, 2026
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आयकर विभाग ने जारी किए अपडेटेड ITR-1 और ITR-2 फॉर्म, अब 48 महीनों तक दाखिल कर सकेंगे अपडेटेड रिटर्न

नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। आयकर विभाग ने करदाताओं के लिए बड़ी राहत की घोषणा करते हुए आकलन वर्ष 2021-22 और 2022-23 के लिए अपडेटेड इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म ITR-1 और ITR-2 जारी कर दिए हैं। अब करदाता अद्यतन रिटर्न (ITR-U) को दाखिल करने के लिए पहले के 24 महीनों की जगह 48 महीनों का समय पा सकेंगे। यह घोषणा वित्त अधिनियम, 2025 के तहत की गई है।

क्या है अपडेटेड ITR-U रिटर्न?

ITR-U यानी Updated Income Tax Return, एक ऐसा विकल्प है जो करदाताओं को स्वैच्छिक अनुपालन (Voluntary Compliance) का अवसर देता है। इसका उद्देश्य विवादों को कम करना और कर प्रणाली को सरल बनाना है।
इसका इस्तेमाल उस स्थिति में किया जा सकता है जब किसी करदाता ने:

  • रिटर्न भरा ही नहीं हो,

  • गलत विवरण प्रस्तुत किया हो,

  • या रिटर्न भरने के बाद कोई गलती महसूस की हो।

यह फॉर्म केवल उन्हीं मामलों में दाखिल किया जा सकता है जहां करदाता अधिक आय घोषित करना चाहता है। इसका उपयोग टैक्स कम करने, रिफंड पाने या हानि दिखाने के लिए नहीं किया जा सकता।


अब 48 महीनों तक कर सकेंगे ITR-U दाखिल

आयकर विभाग ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर कहा कि अब करदाताओं के पास किसी भी आकलन वर्ष की समाप्ति के 48 महीनों के भीतर ITR-U दाखिल करने का विकल्प उपलब्ध रहेगा। यह बदलाव धारा 139(8A) के अंतर्गत किया गया है।

यह प्रावधान उन करदाताओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो किसी तकनीकी त्रुटि या जानकारी की कमी के कारण सही समय पर अपना रिटर्न दाखिल नहीं कर सके थे।


अपडेटेड ITR दाखिल करने के लाभ

  • पुराने रिटर्न में गलती सुधारने का अवसर

  • मुकदमेबाजी और नोटिस से बचाव

  • खुद से सुधार करने की प्रक्रिया से करदाता के अधिकारों में वृद्धि

  • सरकार को वास्तविक राजस्व प्राप्ति में सहयोग


कौन कर सकता है ITR-U दाखिल?

  • जिसने पहले रिटर्न दाखिल नहीं किया

  • जिसने गलत आय या गलत विवरण दिया

  • जिसने कुछ आय छुपाई थी

  • जिसने रिटर्न दाखिल किया लेकिन बाद में संशोधन की आवश्यकता महसूस की

नोट: यह सुविधा उन लोगों के लिए नहीं है जो टैक्स में कमी या रिफंड के लिए आवेदन करना चाहते हैं।


निष्कर्ष

यह कदम आयकर विभाग द्वारा टैक्सपेयर्स के प्रति लचीलापन दिखाने की दिशा में सराहनीय है। इससे ईमानदार करदाता को आत्मसमीक्षा और सुधार का अवसर मिलेगा और देश में टैक्स कंप्लायंस कल्चर को बल मिलेगा। सरकार का यह प्रयास ‘ईज ऑफ डूइंग टैक्सेशन’ को बढ़ावा देता है।

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