नई दिल्ली, 02 अप्रैल (वेब वार्ता)। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। मार्च 2026 में सकल माल एवं सेवा कर कलेक्शन में 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके साथ मासिक राजस्व 2 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। यह वित्त वर्ष 2025-26 में तीसरी बार है जब कलेक्शन इस स्तर तक पहुंचा है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार मार्च महीने में कुल जीएसटी कलेक्शन 2,00,344 करोड़ रुपये रहा। इसमें आयात से प्राप्त राजस्व में सबसे अधिक योगदान रहा, जो 17.8 प्रतिशत बढ़कर 53,861 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं घरेलू स्तर पर भी 5.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संग्रह हुआ।
कर कटौती के बावजूद मजबूत प्रदर्शन
सरकार द्वारा सितंबर 2025 में कई वस्तुओं पर कर दरों में कमी और स्लैब को सरल बनाने के बावजूद राजस्व में मजबूती बनी हुई है। शुरुआत में कलेक्शन में गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन इसके बाद लगातार सुधार देखने को मिला है, जो अर्थव्यवस्था की स्थिरता को दर्शाता है।
पूरे वित्त वर्ष में ऐतिहासिक प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल जीएसटी कलेक्शन 8.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 22.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। अप्रैल 2025 में 2.36 लाख करोड़ रुपये का सर्वाधिक मासिक कलेक्शन दर्ज किया गया था।
राज्यों में महाराष्ट्र सबसे आगे
राज्यों के स्तर पर जीएसटी कलेक्शन में महाराष्ट्र का योगदान सबसे अधिक रहा। इसके अलावा कर्नाटक और गुजरात ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे कुल राजस्व को मजबूती मिली।
मार्च 2026 में आंध्र प्रदेश में भी नेट जीएसटी कलेक्शन में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
आम लोगों के लिए क्या संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन यह दर्शाता है कि देश में उपभोक्ता मांग मजबूत बनी हुई है और कर अनुपालन बेहतर हुआ है। आयात में वृद्धि औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का संकेत देती है, जबकि घरेलू खपत में स्थिरता आर्थिक विश्वास को दर्शाती है।
इससे सरकार के राजकोष को मजबूती मिलती है, जिससे विकास योजनाओं के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित होती है। हालांकि, विशेषज्ञों ने वैश्विक चुनौतियों और महंगाई को देखते हुए भविष्य में मांग पर संभावित असर को लेकर सावधानी बरतने की भी सलाह दी है।



