हरदोई, लक्ष्मीकांत पाठक | वेब वार्ता
देश में लगातार बढ़ती महंगाई अब केवल रसोई, ईंधन और दैनिक जरूरतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर भारतीय समाज की परंपरागत और सांस्कृतिक धरोहर पर भी दिखने लगा है। महिलाओं के सुहाग से जुड़ी वस्तुएं — जैसे मंगलसूत्र, बिछिया, पायल और करधनी — अब आम परिवारों की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। सोना और चांदी के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से शादी-ब्याह की पारंपरिक तैयारियां भी प्रभावित हो रही हैं।
सोना-चांदी के भाव ऐतिहासिक स्तर पर
ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के प्रमुख सर्राफा बाजारों में सोना 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3.10 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। इससे बिछिया, पायल, करधनी और पारंपरिक आभूषणों के दामों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
शाहाबाद नगर के स्वर्णकार ऋषि मिश्र ने बताया, “सोना-चांदी अब आम आदमी की पकड़ से बाहर हो चुका है। पहले लोग शादी या त्योहार पर कई गहने खरीदते थे, लेकिन अब देखने भर तक सीमित रह गए हैं। अब एक पायल या बिछिया खरीदना भी लग्जरी बन गया है।”
सुहाग की परंपराएं बन रहीं ‘लक्जरी’
भारतीय समाज में मंगलसूत्र, बिछिया और पायल सिर्फ गहने नहीं, बल्कि विवाह और सुहाग के प्रतीक माने जाते हैं। परंतु लगातार बढ़ती कीमतों के चलते ये प्रतीक अब आम महिला की पहुंच से बाहर जा रहे हैं। खासतौर पर ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों की महिलाएं इन वस्तुओं को खरीदने से पहले कई बार सोचने को मजबूर हैं। अब नई बिछिया या पायल खरीदना भी बजट तोड़ देने वाला निर्णय बन गया है।
शादी-ब्याह के बाजार पर पड़ा असर
पहले जहां शादी के सीजन में सर्राफा बाजारों में भारी भीड़ और चहल-पहल रहती थी, अब वहां सन्नाटा नजर आता है। बढ़ते दामों के चलते लोग सोने की जगह हल्के वजन या नकली गहनों का विकल्प अपना रहे हैं। कई परिवारों ने शादी की तैयारियों में गहनों की सूची में कटौती कर दी है। इससे पारंपरिक आभूषण व्यवसाय पर भी सीधा असर पड़ा है।
सर्राफा व्यापारी संघ के सदस्यों का कहना है कि “महिलाओं की पारंपरिक आस्था सोने-चांदी से जुड़ी रही है, लेकिन जब कीमतें इतनी ऊंची हो जाएं कि खरीदना मुश्किल हो जाए, तो संस्कृति पर भी असर पड़ता है।” उनका कहना है कि अब गोल्ड प्लेटेड और कृत्रिम आभूषणों की मांग बढ़ी है, जिससे असली गहनों की बिक्री में गिरावट आई है।
आम लोगों की बढ़ती चिंता
बढ़ती महंगाई से आम परिवारों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। लोग पहले से ही गैस, पेट्रोल, राशन और शिक्षा में बढ़ते खर्च से परेशान हैं, और अब सुहाग से जुड़ी वस्तुएं भी पहुंच से दूर हो रही हैं। एक स्थानीय महिला सीमा तिवारी कहती हैं, “पहले हर साल शादी की सालगिरह पर नई पायल खरीद लेती थी, लेकिन अब दाम सुनकर डर लगने लगता है। ये चीजें अब हमारी संस्कृति में बस यादें बनती जा रही हैं।”
सरकार से राहत की उम्मीद
आम जनता और व्यापारी दोनों ही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार जल्द ही महंगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाएगी। सर्राफा बाजार से जुड़े लोगों ने मांग की है कि सोना-चांदी पर लगने वाले करों में राहत दी जाए ताकि आम आदमी की क्रय शक्ति फिर से बढ़ सके। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में पारंपरिक आभूषणों की संस्कृति पर भी खतरा मंडरा सकता है।
- सोना ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹3.10 लाख प्रति किलो के पार।
- मंगलसूत्र, बिछिया, पायल जैसी सुहाग की वस्तुएं आम महिला की पहुंच से बाहर।
- शादी-विवाह के बाजार में मंदी, नकली आभूषणों की मांग में वृद्धि।
परंपराओं पर महंगाई की यह मार समाज के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर रही है। जहां एक ओर भारतीय संस्कृति में सुहाग की वस्तुएं श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक हैं, वहीं दूसरी ओर इनकी बढ़ती कीमतें भावनाओं और अर्थव्यवस्था दोनों पर भारी पड़ रही हैं। जनता की उम्मीद है कि आने वाले बजट में सरकार कुछ राहत अवश्य देगी।
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