नई दिल्ली, 04 अप्रैल (वेब वार्ता)। कच्चे माल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब साइकिल उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। इसी के चलते जी-13 बाइसिकल फोरम से जुड़े निर्माताओं ने आपात बैठक में सर्वसम्मति से साइकिलों के दाम बढ़ाने का निर्णय लिया है।
फोरम के प्रतिनिधियों ने बताया कि स्टील, प्लास्टिक, टायर-ट्यूब, ब्रास और निकेल जैसी आवश्यक सामग्री की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे उत्पादन लागत में भारी इजाफा हुआ है।
अलग-अलग श्रेणियों में बढ़ी कीमतें
नई दरों के अनुसार विभिन्न श्रेणियों की साइकिलों के दाम में वृद्धि की गई है। स्टैंडर्ड साइकिलों की कीमत में 235 रुपये का इजाफा किया गया है। वहीं एमटीबी और महिलाओं की साइकिलों के दाम 260 रुपये तक बढ़ाए गए हैं।
इसके अलावा बच्चों की साइकिलों की कीमत में 225 रुपये और मल्टीस्पीड साइकिलों में 350 रुपये तक की बढ़ोतरी लागू की गई है। यह नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
उद्योग के सामने अस्तित्व का संकट
फोरम के प्रधान Rajinder Jindal ने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल ने उद्योग की लागत संरचना को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। ऐसे में बिना कीमत बढ़ाए उत्पादन जारी रखना कठिन हो गया है।
महासचिव Rohit Pahwa ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय उद्योग के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए लिया गया है और इसका उद्देश्य केवल बढ़ी हुई लागत की आंशिक भरपाई करना है।
वहीं समन्वयक Umesh Kumar Narang ने संकेत दिया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आगे भी आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
15 अप्रैल को फिर होगी समीक्षा
निर्माताओं ने निर्णय लिया है कि 15 अप्रैल को एक बार फिर हालात की समीक्षा की जाएगी। यदि कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो प्रति साइकिल 100 रुपये तक अतिरिक्त बढ़ोतरी की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इनपुट लागत में कमी नहीं आई, तो इसका असर न केवल बाजार की मांग पर पड़ेगा, बल्कि उपभोक्ताओं की जेब पर भी अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।



