नई दिल्ली, अंतर्राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
गणतंत्र दिवस 2026 की मुख्य अतिथि उर्सुला वॉन डेर लेयन
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह को इस वर्ष वैश्विक कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। इस अवसर पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। उनके साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा सहित यूरोपीय संघ के कई वरिष्ठ अधिकारी भी भारत पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि गणतंत्र दिवस परेड के बाद भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर निर्णायक हस्ताक्षर हो सकते हैं, जिससे दोनों पक्षों के संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचेंगे।
« The mother of all trade deals »
We are closing in on the 🇪🇺🇮🇳 Free Trade Agreement.
See you soon in Delhi. pic.twitter.com/gfiLv2eEam
— Ursula von der Leyen (@vonderleyen) January 24, 2026
कौन हैं उर्सुला वॉन डेर लेयन
उर्सुला वॉन डेर लेयन वर्तमान में यूरोपीय संघ (EU) के सर्वोच्च कार्यकारी निकाय यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष हैं। वर्ष 2019 में वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला बनीं और 2024 में लगातार दूसरी बार चुनी गईं। वह 27 यूरोपीय देशों के साझा राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक हितों का वैश्विक मंच पर प्रतिनिधित्व करती हैं।
शुरुआती जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
उर्सुला वॉन डेर लेयन का जन्म 8 अक्टूबर 1958 को ब्रसेल्स (बेल्जियम) में हुआ। उनके पिता अर्न्स्ट आलरेक यूरोपीय आयोग के वरिष्ठ अधिकारी और बाद में जर्मनी के लोअर सैक्सनी प्रांत के प्रमुख रहे। मां हाइडी-एडेल आलरेक शिक्षाविद् थीं। इसी कारण उर्सुला को बचपन से ही राजनीति, कूटनीति और शिक्षा से जुड़ा वातावरण मिला।
शिक्षा: अर्थशास्त्र से चिकित्सा तक का सफर
उर्सुला ने ब्रसेल्स के यूरोपियन स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने गोटिंगेन विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। आगे चलकर उन्होंने हनोवर मेडिकल स्कूल से चिकित्सा शिक्षा पूरी की और एक प्रशिक्षित डॉक्टर के रूप में भी कार्य किया।
राजनीति में प्रवेश और जर्मनी में सियासी सफर
चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के बाद उर्सुला ने 40 वर्ष की उम्र में राजनीति में कदम रखा। वह क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) की सदस्य बनीं और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की सरकार में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाली कैबिनेट मंत्री रहीं।
उर्सुला का सियासी करियर: प्रमुख पद
| कार्यकाल | पद | मुख्य योगदान |
|---|---|---|
| 2003–2005 | सामाजिक मामलों की मंत्री (लोअर सैक्सनी) | सामाजिक और स्वास्थ्य नीतियों का प्रबंधन |
| 2005–2009 | संघीय परिवार मामलों की मंत्री | मातृत्व अवकाश को पैरेंटल लीव में बदला |
| 2009–2013 | संघीय श्रम एवं सामाजिक मामलों की मंत्री | श्रम बाजार और सामाजिक सुरक्षा सुधार |
| 2013–2019 | जर्मनी की रक्षा मंत्री | सेना सुधार और NATO सहयोग मजबूत |
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष के रूप में उपलब्धियां
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष रहते हुए उर्सुला वॉन डेर लेयन ने कोविड-19 महामारी, ऊर्जा संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संकटों के दौरान यूरोप का नेतृत्व किया। उन्होंने 2050 तक यूरोप को पहला जलवायु-तटस्थ महाद्वीप बनाने का संकल्प लिया और हरित ऊर्जा नीतियों को गति दी।
विवाद और आलोचनाएं
रक्षा मंत्री रहते हुए उर्सुला पर बाहरी सलाहकारों को दिए गए अनुबंधों में अनियमितताओं के आरोप लगे, जिसकी संसदीय जांच भी हुई। हालांकि, वह व्यक्तिगत रूप से किसी आपराधिक दोष में नहीं पाई गईं।
निजी जीवन और संपत्ति
उर्सुला वॉन डेर लेयन के सात बच्चे हैं। उनके पति हाइको वॉन डेर लेयन चिकित्सा प्रोफेसर और एक मेडिकल इंजीनियरिंग कंपनी के सीईओ हैं। वर्ष 2025 तक उनकी अनुमानित कुल संपत्ति 3.5 से 4 मिलियन डॉलर आंकी गई है। उन्हें घुड़सवारी, पियानो और शास्त्रीय संगीत का शौक है।
निष्कर्ष
गणतंत्र दिवस 2026 पर उर्सुला वॉन डेर लेयन की मौजूदगी भारत-यूरोप संबंधों के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है। एक शिक्षाविद्, डॉक्टर और अनुभवी राजनीतिज्ञ के रूप में उनका सफर न केवल यूरोप बल्कि वैश्विक राजनीति में महिला नेतृत्व की सशक्त मिसाल प्रस्तुत करता है।
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