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सर्प वंश की विष वर्षा को आमंत्रित करता बंगाल

-डा. रवीन्द्र अरजरिया- Dr. Ravindra Arjariya

बंगाल में लोकतांत्रिक व्यवस्था पर आतंक का ग्रहण लग चुका है। चुनाव काल में भय का वातावरण चारों ओर देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस ने खुलेआम धमकियों का बाजार गर्म किया। निर्वाचन आयोग तक पर पक्षपात के आरोप गढे। केन्द्रीय सुरक्षा बलों पर भाजपा के एजेन्ट के तौर पर काम करने की बातें कहीं। न्यायपालिका के अधिकारियों से लेकर मीडियाकर्मियों तक को बंधक बनाने की कोशिशें की गईं। प्रदेश के राज्यपाल तक को अपमानित करने, उन पर आक्रमण करने तथा दबंगी का परचम फहराने के कोशिशों में इजाफा करने वाली स्थितियां ममता राज में होती रहीं हैं।

वर्तमान में तो दूर दराज के अनेक इलाकों में स्थानीय पुलिस बल से लेकर प्रशासनिक तंत्र तक को अनियमितताओं, गुण्डागिरी तथा आतंक के समक्ष नतमस्तक होते देखा गया। निष्पक्ष चुनाव हेतु तैनात किये गये अनेक कठोर अधिकारियों को हटाने के लिए न्यायालय तक के दरवाजे खटखटाये गये। ऐसा ही प्रयास तृणमूल कांग्रेस द्वारा अपने एक कुख्यात कार्यकर्ता को बचाने के लिए राज्य सरकार के अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए उच्चतम न्यायालय तक की यात्रा तय की गई थी। बांग्लादेश के रास्ते घुसपैठ करके पश्चिम बंगाल में जडें जाम चुके अनेक आतंकवादियों ने चुनाव के दौरान कानून की खुलेआम धज्जियां उडायीं। कानूनी प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न किये। ईवीएम पर टेप लगाने, पहचान छुपाकर मतदान करने, सरेआम धमकाने, मारपीट करने, प्राणघातक हमले करने जैसी अनगिनत घटनाओं ने बंगाल चुनाव में अनियमितताओं के नये कीर्तिमान स्थापित किये है। एग्जिट पोल आने के बाद तो वहां का वातावरण बेलगाम होता जा रहा है। परिणाम आने के पहले ही अनेक स्थानों पर घमासान होने लगा है।

पार्टियों के प्रवक्ताओं के अमर्यादित शब्दों से गूंजते छोटे पर्दे, चौराहों पर होती तीखी बहसें और चौपालों पर डीगें हांकते कार्यकर्ताओं ने आम नागरिक के सामने भविष्य की सुरक्षा जैसे अनेक प्रश्न खडे करने शुरू कर दिये हैं। चुनावी प्रक्रिया में तैनात अनेक अधिकारियों के निजी अनुभवों ने बंगाल की स्थिति को समस्याओं के नया दावानल के रूप में परिभाषित किया है। राज्य में प्रायोजित आतंक से बिगडते हालातों को नियंत्रित करने के लिए आने वाले समय में कठोर कदम उठाने, आतंकवादियों को चिन्हित करने तथा घुसपैठियों को वापिस भेजने जैसे कार्य करने ही होंगे अन्यथा परिणामों की घोषणा के साथ ही खूनी जंग हेतु रचे गये षडयंत्र का व्यवहारिक स्वरूप सामने आ सकता है। प्रदेश मुख्यालय से लेकर छोटे गांवों तक आतंक की अशान्ति हेतु असलहे जमा किये जा चुके हैं। ऐसी सूचनायें शासन-प्रशासन तक निरंतर पहुंच रहीं है परन्तु किन्ही खास कारणों से स्थानीय स्तर पर कार्य करने वाले राज्यकर्मचारी धृतराष्ट्र बने बैठे हैं। निर्वाचन आयोग के द्वारा तैनात किये गये अन्य राज्यों के अधिकारियों की भूमिका को यदि भुला दिया जाये तो समूचे प्रदेश में गुण्डाराज के ठहाके स्पष्ट सुनाई देने लगेंगे। बंगाल के अन्तिम छोर पर बैठे आम नागरिकों को तृणमूल कांग्रेस और उसकी घुसपैठी जमात ने खासा आतंकित कर रखा है।

राज्य सरकार की शह पर होने वाली गुण्डागिरी से वहां के निवासी निजात तो पाना चाहता है परन्तु सीधी दुश्मनी मोल लेकर जान का जोखिम उठाने हेतु कदापि तैयार नहीं है। दुर्गम इलाकों में चुनाव कवरेज के दौरान जो स्थिति दिखाई पडी, लोगों ने दबी जुबान में जो बताया और सहमी आंखों ने जो मौन संवाद किया, वह आने समय में फटने वाले ज्वालामुखी की आहट जैसा था। मतदान के दौरान भी दहशत का माहौल देखने को मिला। सुरक्षाकर्मियों की उपस्थिति और अनुपस्थिति के हालातों में जमीन आसमान का अन्तर देखने को मिलता रहा। आतंक के सांप तो सांप, सपोले और नागिनों तक का विष नृत्य के समक्ष संविधान की पुस्तक में दर्ज उपचार रूपी मंत्र स्वयं भी विलोपित हो गये हैं। प्रत्यक्षीकरण के आधार पर बंगाल में सर्प वंश की विष वर्षा की प्रबल होती संभावनाओं से इंकार नही किया जा सकता। वहां सीमापार से हथियारों, विस्फोटों और दुर्दान्त आतंकियों की निरंतर आमद दर्ज हो रही है जो राज्य के अलावा देश के विभिन्न भागों तक भी पहुंच रही है।

इस माफिया रैकेट में अपराधियों के साथ कार्यपालिका और विधायिका के अनेक उत्तरदायी लोगों की जुगलबंदी देखने को मिल रही है। सुरक्षा, जांच और चौकसी से जुडे तंत्र में  माफियों की पकड के अनेक उदाहरण अक्सर सामने आते रहते हैं जिन्हें हायतौबा मचाने पर जांच के नाम पर शान्त कर दिया जाता है। वर्तमान हालातों को देखते हुए यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि बंगाल के कोन-कोन में पहुंच चुके घुसपैठियों ने वहां के मीरजाफरों के साथ मिलकर चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद खेले जाने वाले खेला की खूनी स्क्रिप्ट पर काम पूरा कर लिया है। ऐसे में निर्वाचन आयोग और केन्द्र सरकार को वहां के आम नागरिक की सुरक्षा हेतु पहले से ही सचेत, चौकस और चौकन्ना रहने से सभी मापदण्ड पूरे कर लेने होंगे अन्यथा षडयंत्रकारियों के मंसूबे पूरे होते देर नहीं लगेगी। इस बार बस इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी।

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