तेहरान/वॉशिंगटन, 28 अप्रैल (वेब वार्ता)। होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी तेल ले जा रहे दो टैंकरों को जब्त किए जाने के बाद तेहरान ने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध बताया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिकी कार्रवाई को “समुद्र में हथियारों के बल पर की गई लूट” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका समुद्री डकैती को वैध ठहराने का प्रयास कर रहा है। बघाई ने कहा कि खुले समुद्र में जहाजों को जब्त करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और यह वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है।
उन्होंने सामाजिक माध्यम पर जारी संदेश में कहा कि दुनिया अब “समुद्री लुटेरों की वापसी” देख रही है, फर्क सिर्फ इतना है कि अब यह सब सरकारी आदेश और झंडे के तहत किया जा रहा है। बघाई ने अमेरिकी अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे कानूनी वारंट का सहारा लेकर इस कार्रवाई को सही ठहराने का प्रयास कर रहे हैं।
वहीं, अमेरिका ने इस कार्रवाई को पूरी तरह वैध बताया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ‘मेजेस्टिक एक्स’ और ‘टिफानी’ नामक दोनों जहाजों को अदालत द्वारा जारी आदेश के आधार पर रोका गया। उनका कहना है कि यह कदम अवैध तेल व्यापार को रोकने और प्रतिबंधित संगठनों को मिलने वाले आर्थिक लाभ को बाधित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अमेरिकी पक्ष के अनुसार, जब इन जहाजों को हिंद महासागर में रोका गया, तब इनमें लगभग 19 लाख बैरल ईरानी तेल लदा हुआ था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आगे भी ऐसे मामलों में निगरानी, जांच और आवश्यक कार्रवाई जारी रहेगी।
इसी बीच अमेरिका ने वैश्विक स्तर पर कंपनियों को चेतावनी भी जारी की है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि यदि कोई भी कंपनी ईरान की हवाई सेवाओं की सहायता करती है, तो उसके खिलाफ भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे। यह कदम ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, वहां बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ती टकराव की स्थिति वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बनती जा रही है।



