सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अनारक्षित पद सभी के लिए खुले, योग्यता ही चयन का आधार

नई दिल्ली, 08 अप्रैल (वेब वार्ता)। सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अनारक्षित पदों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसी रिक्तियां किसी एक सामाजिक श्रेणी तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि सभी पात्र अभ्यर्थियों के लिए खुली होती हैं। अदालत ने कहा कि इन पदों पर चयन का एकमात्र आधार योग्यता होना चाहिए।

हाईकोर्ट का फैसला किया निरस्त

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें कम अंक प्राप्त सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार को अधिक अंक पाने वाले अन्य वर्ग के अभ्यर्थी पर प्राथमिकता दी गई थी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अनारक्षित श्रेणी कोई अलग सामाजिक वर्ग नहीं है, बल्कि यह सभी वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए समान रूप से खुला मंच है।

योग्यता को सर्वोपरि माना

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि अन्य आरक्षित वर्गों से संबंधित कोई दिव्यांग अभ्यर्थी अधिक योग्य है, तो उसे केवल इस आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता कि सामान्य श्रेणी का कोई उम्मीदवार उपलब्ध है।

न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह ने अपने निर्णय में कहा कि अनारक्षित श्रेणी का अर्थ किसी विशेष सामाजिक वर्ग से नहीं है, बल्कि यह सभी के लिए समान अवसर प्रदान करने वाला खुला क्षेत्र है।

भर्ती विवाद से जुड़ा था मामला

यह मामला पश्चिम बंगाल राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में कनिष्ठ अभियंता (सिविल) पद की भर्ती से संबंधित था। एक पद दिव्यांग (कमजोर दृष्टि) श्रेणी के लिए अनारक्षित रखा गया था।

इस पद के लिए एक सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी ने 55.667 अंक प्राप्त किए थे, जबकि ओबीसी श्रेणी के अभ्यर्थी ने 66.667 अंक हासिल किए थे। कंपनी ने अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी को नियुक्त कर दिया था, जिसे बाद में अदालत में चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने बहाल किया कंपनी का निर्णय

उच्चतम न्यायालय ने कंपनी के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि अधिक योग्य अभ्यर्थी को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य अवसरों का विस्तार करना है, न कि योग्यता की अनदेखी करना।

यह फैसला भविष्य की भर्तियों में एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक के रूप में देखा जा रहा है, जिससे स्पष्ट होता है कि अनारक्षित पदों पर सभी वर्गों के योग्य उम्मीदवार समान रूप से दावेदारी कर सकते हैं।

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