कोलकाता, 08 अप्रैल (वेब वार्ता)। भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस बार अपनी रणनीति में अहम बदलाव किया है। पिछले चुनाव के अनुभवों से सबक लेते हुए पार्टी ने बाहरी नेताओं के लिए सख्त आचार निर्देश जारी किए हैं, ताकि किसी भी प्रकार के विवाद से बचा जा सके।
बाहरी नेताओं को दिए गए सख्त निर्देश
पार्टी ने चुनावी अभियान में शामिल प्रवासी नेताओं को अनजान महिलाओं से दूरी बनाए रखने, स्थानीय संस्कृति के अनुरूप बांग्ला परिधान अपनाने और सार्वजनिक स्थानों पर राजनीतिक बहस से बचने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही नेताओं को मीडिया में अनावश्यक बयान देने से भी रोका गया है और उन्हें स्थानीय नेतृत्व के साथ समन्वय में काम करने की सलाह दी गई है।
स्थानीय नेताओं के साथ समन्वय पर जोर
भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि बाहरी नेता पर्दे के पीछे रहकर कार्य करें और स्थानीय नेताओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्हें यह भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने पहनावे और व्यवहार में स्थानीय लोगों के साथ सामंजस्य स्थापित करें तथा अलग पहचान बनाने से बचें।
पिछले चुनाव से लिया सबक
पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा उठाकर भाजपा को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया था। इसके अलावा कुछ नेताओं पर लगे आरोपों ने भी पार्टी की छवि को प्रभावित किया था।
इन्हीं कारणों से इस बार पार्टी नेतृत्व कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और पहले से ही सतर्क रणनीति अपनाई जा रही है।
अब तक रणनीति रही सफल
भाजपा ने पिछले वर्ष नवंबर से ही चुनावी तैयारियां तेज कर दी थीं। राज्य को पांच जोन में बांटकर विभिन्न राज्यों के संगठन पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई। विधानसभा स्तर पर प्रभारी और विस्तारक नियुक्त किए गए, जबकि जिला स्तर पर संयोजकों की तैनाती की गई।
अब तक पार्टी की यह रणनीति विवादों से बचने में सफल रही है और संगठनात्मक स्तर पर मजबूती देखने को मिल रही है।
चुनावी मुकाबले में अहम भूमिका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार भाजपा स्थानीय मुद्दों और संगठनात्मक मजबूती के आधार पर चुनावी मैदान में उतर रही है। बाहरी नेताओं की भूमिका सीमित रखते हुए पार्टी अपने पिछले प्रदर्शन में सुधार की कोशिश कर रही है।
आने वाले समय में यह रणनीति चुनावी परिणामों को किस हद तक प्रभावित करती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



