वाशिंगटन, 05 अप्रैल (वेब वार्ता)। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम को तेहरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी प्रकार के दबाव में झुकने वाला नहीं है और धमकियों का जवाब देने के लिए तैयार है।
अमेरिका की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिका और इजरायल, दोनों ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। हाल ही में संयुक्त सैन्य कार्रवाइयों के बाद हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं। इजरायल की ओर से ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमलों के संकेत दिए गए हैं, हालांकि इसके लिए वॉशिंगटन की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।
जंग के बीच बढ़ता खतरा
मौजूदा संघर्ष के बीच जोखिम लगातार बढ़ रहा है। दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों के गिराए जाने के बाद एक लापता अमेरिकी दल सदस्य की खोज जारी है। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि जमीनी और हवाई संघर्ष अब अधिक तीव्र हो चुका है, भले ही अमेरिका अपनी हवाई बढ़त का दावा करता रहा हो।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र
ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से बंद किए जाने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है। यह मार्ग दुनिया के तेल व्यापार का एक प्रमुख रास्ता माना जाता है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता और आर्थिक चिंता बढ़ने लगी है। इसी बीच, क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं भी बढ़ी हैं, जिससे संघर्ष के और विस्तार की आशंका गहरा गई है।
’48 घंटे में फैसला करो’ की चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने सामाजिक माध्यम पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि या तो समझौता किया जाए या 48 घंटे के भीतर जलडमरूमध्य खोल दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि समय समाप्त हो रहा है और तय समयसीमा के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उनके बयानों में लगातार बदलाव देखने को मिला है, जिससे स्थिति और अनिश्चित बनी हुई है।
ईरान की सख्त प्रतिक्रिया
ईरान ने इस अल्टीमेटम को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। खात्म अल-अनबिया मुख्यालय के एक वरिष्ठ कमांडर ने अमेरिकी बयान को असंतुलित और अव्यवहारिक करार दिया। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि तेहरान बातचीत के लिए सिद्धांत रूप में तैयार है, लेकिन किसी भी समझौते के लिए पहले “गैरकानूनी जंग” का अंत होना आवश्यक है।
ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में फैल सकता है। साथ ही, परमाणु ठिकानों के आसपास संभावित हमलों से रेडिएशन रिसाव का खतरा भी जताया गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने नए वायु रक्षा तंत्र तैनात किए हैं और अमेरिकी विमानों को मार गिराने में सफलता हासिल की है। इसके अलावा, इजरायल और अन्य लक्ष्यों पर मिसाइल और ड्रोन हमले भी जारी हैं।
इस बढ़ते टकराव ने न केवल क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाल दिया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव डालने की आशंका को जन्म दिया है।



