कोलकाता, 04 अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब यह विवाद सड़कों तक पहुंच गया है। कई स्थानों पर प्रदर्शन और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई है।
शिविरों के बाहर प्रदर्शन और तोड़फोड़
जानकारी के अनुसार, मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े सुनवाई शिविरों के बाहर विरोध प्रदर्शन किए गए। कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ की घटनाएं भी हुईं, जिनमें फरक्का और भंगड़ार जैसे इलाके प्रमुख रूप से सामने आए हैं। इन घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
चुनाव आयोग का कड़ा निर्देश
इन घटनाओं के बाद Election Commission of India ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने सभी जिला मजिस्ट्रेट और जिला चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसी किसी भी घटना पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जाए।
साथ ही, दर्ज की गई प्राथमिकी की प्रति मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय को भेजना अनिवार्य किया गया है, ताकि पूरे मामले की निगरानी की जा सके।
उच्चतम न्यायालय के आदेश के तहत कार्रवाई
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह निर्देश Supreme Court of India के 19 जनवरी के आदेश के अनुरूप तत्काल प्रभाव से लागू किए जाएं। यदि किसी भी सरकारी कार्यालय या सुनवाई स्थल पर हिंसा, तोड़फोड़ या अधिकारियों पर हमला होता है, तो संबंधित अधिकारी तुरंत स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज करें।
इसके अलावा, इसकी सूचना पुलिस अधीक्षक और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भी देना अनिवार्य होगा।
देरी पर होगी कड़ी कार्रवाई
आयोग ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं जारी रहती हैं, तो संबंधित सुनवाई को मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अनुमति के बिना स्थगित किया जा सकता है।
साथ ही, प्राथमिकी दर्ज करने में किसी भी प्रकार की देरी को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित जिला चुनाव अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बंगाल में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच आयोग की यह सख्ती चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



