राखीगढ़ी, 03 अप्रैल (वेब वार्ता)। हड़प्पाकालीन पुरातात्विक स्थल राखीगढ़ी की साइट नंबर-7 पर खुदाई के दौरान एक और मानव कंकाल का ऊपरी हिस्सा मिला है। इससे चार दिन पहले भी इसी स्थान से एक कंकाल मिला था, जिससे इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है।
पुरातत्व विभाग की निगरानी में चल रही खुदाई में मिट्टी को बेहद सावधानी और वैज्ञानिक तरीके से हटाया जा रहा है, ताकि किसी भी अवशेष को नुकसान न पहुंचे। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों कंकालों को सुरक्षित बाहर निकालने में 10 से 15 दिन का समय लग सकता है।
साइट नंबर-7 को पहले ही एक प्राचीन कब्रिस्तान स्थल के रूप में पहचाना जा चुका है, जहां अब तक 60 से अधिक मानव कंकाल मिल चुके हैं। एक ही स्थान पर दो कंकालों का मिलना हड़प्पाकालीन अंतिम संस्कार की परंपराओं और सामाजिक संरचना के बारे में महत्वपूर्ण संकेत देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन कंकालों के अध्ययन से उस समय के लोगों की जीवनशैली, स्वास्थ्य, आनुवंशिक विशेषताओं और मृत्यु के कारणों से जुड़े अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। इसके लिए डीएनए और अन्य जैविक परीक्षण भी किए जाएंगे।
हालांकि, लगातार बदलते मौसम और बारिश के कारण खुदाई कार्य प्रभावित हो रहा है। मिट्टी में नमी बढ़ने से टीम को अधिक सतर्कता के साथ काम करना पड़ रहा है।
अधिकारी के अनुसार
राखीगढ़ की साइट नंबर सात पर खोदाई चल रही है और पुरातात्विक महत्व की कई चीजें मिल रही हैं जो शोध की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। खोदाई में जो भी सामग्री मिल रही है उनका बारीकी से अध्ययन भी किया जा रहा है।
-मनोज सक्सेना, अधीक्षण पुरातत्वविद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा, ग्रेटर नोएडा।



