नई दिल्ली/कोलकाता, 02 अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम बंगाल में महंगाई भत्ते को लेकर चल रहे लंबे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए करीब 20 लाख कर्मचारियों को राहत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों का लागू करने योग्य अधिकार है और इसका भुगतान अनिवार्य है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2008 से 2019 तक की अवधि का बकाया महंगाई भत्ता कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए। साथ ही निर्देश दिया गया कि कुल बकाया राशि का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा 6 मार्च तक जारी किया जाए।
चार सदस्यीय समिति गठित करने के निर्देश
यह आदेश न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने दिया। पीठ ने राज्य सरकार को शेष 75 प्रतिशत बकाया पर निर्णय लेने के लिए चार सदस्यीय समिति गठित करने का निर्देश भी दिया है।
अदालत ने कहा कि एक बार महंगाई भत्ता को वैधानिक नियमों के तहत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ दिया जाता है, तो उसकी गणना की पद्धति को बाद में बदला नहीं जा सकता।
कर्मचारियों का अधिकार बताया
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि महंगाई भत्ता कोई अतिरिक्त लाभ नहीं, बल्कि कर्मचारियों के न्यूनतम जीवन स्तर को बनाए रखने का एक आवश्यक साधन है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी इस मामले के दौरान सेवानिवृत्त हो चुके हैं, वे भी इस बकाया राशि के हकदार होंगे।
सरकार से मांगी स्थिति रिपोर्ट
पीठ ने राज्य सरकार को पहली किस्त के भुगतान के बाद स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी, जिसमें अनुपालन की समीक्षा की जाएगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों ने इसे कर्मचारियों की जीत बताते हुए राज्य सरकार की आलोचना की है।
यह मामला लंबे समय से लंबित था और अब अदालत के इस फैसले के बाद कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।



