कछौना में अवैध मिट्टी खनन का कहर, सड़कों से लेकर खेत तक हो रहे तबाह

-लक्ष्मीकांत पाठक

हरदोई, 31 मार्च (वेब वार्ता)। जिले के कछौना क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे पर्यावरण और जनजीवन दोनों पर गंभीर असर पड़ रहा है। सरकारी तंत्र की कथित ढिलाई और विभागीय मिलीभगत के आरोपों के बीच खनन माफिया खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।

क्षेत्र के रैंसो, बघुआमऊ, सैदूपुर, इनायतपुर, कटियामऊ, लोन्हारा, बेरुआ, पतसेनी देहात, समसपुर और टिकारी सहित कई गांवों में अवैध खुदाई और ओवरलोड डंपरों का संचालन लगातार जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले की गई सीमित कार्रवाई के बाद भी हालात में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।

कार्रवाई के बाद भी नहीं रुका अवैध खनन

पूर्व में उपजिलाधिकारी संडीला द्वारा कटियामऊ सहित कुछ गांवों में छापेमारी कर जेसीबी और डंपरों को सीज किया गया था, जिससे लोगों को उम्मीद जगी थी कि अवैध खनन पर रोक लगेगी। लेकिन वर्तमान स्थिति में खनन माफिया फिर सक्रिय हो गए हैं और बिना किसी डर के अपना काम जारी रखे हुए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, औद्योगिक गतिविधियों, ईंट भट्ठों और निजी निर्माण कार्यों की आड़ में जंगलों और किसानों की भूमि का स्वरूप बदला जा रहा है, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है।

सड़कों की हालत बदहाल, आमजन परेशान

अवैध खनन का सबसे बड़ा असर क्षेत्र की सड़कों पर देखने को मिल रहा है। रैंसो, बघुआमऊ, बरौली, इनायतपुर और कटियामऊ जैसे गांवों की सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। बरौली-पटकुलियां मार्ग पर ओवरलोड डंपरों की आवाजाही से हालात और भी खराब हो गए हैं।

स्थिति यह है कि इन मार्गों पर चलना तक मुश्किल हो गया है। स्कूली वाहन और एम्बुलेंस तक प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पहले भी गड्ढों में जलभराव के कारण बच्चों के डूबने जैसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

विभागों पर मिलीभगत के आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस, राजस्व और खनन विभाग के बीच कथित गठजोड़ के चलते यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। एक ओर लोक निर्माण विभाग सड़कों की मरम्मत पर भारी खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर खनन माफिया सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

आंदोलन की चेतावनी

क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन से अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

स्पष्ट है कि कछौना क्षेत्र में अवैध खनन न केवल पर्यावरण बल्कि आम जनजीवन के लिए भी गंभीर संकट बन चुका है, जिस पर त्वरित और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।

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