कोलोरेक्टल कैंसर पर चेतावनी, दिल्ली में जागरूकता बेहद कम

नई दिल्ली, 31 मार्च (वेब वार्ता)। कोलोरेक्टल कैंसर जागरूकता माह के अवसर पर जारी एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण में राजधानी दिल्ली से बेहद चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे के अनुसार, 80 प्रतिशत से अधिक लोग यह नहीं जानते कि मल में खून आना कोलोरेक्टल कैंसर का शुरुआती चेतावनी संकेत हो सकता है।

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मर्क स्पेशियलिटीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए गए इस “जीवनशैली एवं पाचन स्वास्थ्य जागरूकता सर्वेक्षण” में देश के 14 प्रमुख शहरों के 10 हजार से अधिक लोगों को शामिल किया गया। अध्ययन में पाया गया कि पाचन संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता अभी भी बेहद कम है।

दिल्ली में स्थिति अधिक चिंताजनक

दिल्ली में शामिल 679 प्रतिभागियों के आंकड़े बताते हैं कि:

  • 80% से अधिक लोग मल में खून को गंभीर संकेत नहीं मानते
  • 89.5% लोग बिना डॉक्टर की सलाह के खुद दवा लेते हैं
  • 65% से अधिक लोग अनियमित मल त्याग से परेशान हैं
  • 80% से अधिक लोगों को अधूरा मल त्याग महसूस होता है
  • 86% लोग नियमित रूप से बाहर या पैकेज्ड भोजन करते हैं
  • केवल 35.5% लोग ही नियमित व्यायाम करते हैं

डॉक्टर से परामर्श लेने में देरी के कारण

सर्वे में यह भी सामने आया कि लोग समय पर डॉक्टर के पास नहीं जाते। इसके प्रमुख कारण हैं:

  • समय की कमी – 35.4%
  • डर – 31.1%
  • झिझक – 17.9%
  • समस्या को गंभीर न मानना – 15.7%

विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि कोलोरेक्टल कैंसर तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बन रहा है।

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डॉ. मनीष सिंघल के अनुसार, यह कैंसर बड़ी आंत या मलाशय में विकसित होता है और अक्सर पॉलिप्स से शुरू होता है। उन्होंने चेताया कि मल त्याग में बदलाव, मल में खून, पेट दर्द, थकान और अचानक वजन घटना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डॉ. शेफाली सरदाना ने कहा कि दिल्ली के लोग लक्षणों को हल्के में लेकर स्वयं दवा लेते हैं, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है। वहीं, डॉ. आदित्य सरीन ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तंबाकू से दूरी इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंताजनक संकेत

देशभर के आंकड़ों में सामने आया कि:

  • 80% लोग डॉक्टर की बजाय खुद दवा लेते हैं
  • 65% से अधिक लोगों को कब्ज या अनियमित मल त्याग की समस्या है
  • 50% से अधिक लोग नियमित रूप से बाहर का भोजन करते हैं
  • केवल 45% लोग ही व्यायाम करते हैं
  • लगभग 40% लोग तंबाकू का सेवन करते हैं

समय पर जांच से बचाव संभव

विशेषज्ञों का कहना है कि कोलोरेक्टल कैंसर को शुरुआती अवस्था में पहचाना जाए तो इसका इलाज संभव है। लेकिन जागरूकता की कमी और जांच में देरी के कारण अधिकांश मामलों में बीमारी देर से पकड़ में आती है।

कुल मिलाकर, यह सर्वेक्षण साफ संकेत देता है कि बदलती जीवनशैली और लापरवाही के कारण पाचन स्वास्थ्य खतरे में है और समय रहते सतर्क नहीं हुए तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

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