पुणे, 31 मार्च (वेब वार्ता)। महाराष्ट्र के पुणे में एक बंगाली प्रवासी मजदूर की हत्या के मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। इस घटना पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे भाषा और पहचान के आधार पर किया गया घृणात्मक अपराध बताया है।
मुख्यमंत्री ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि एक युवक को उसकी भाषा और पहचान के कारण निशाना बनाया गया, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह घटना उस माहौल का परिणाम है, जहां बाहरी लोगों के खिलाफ भय और भेदभाव को बढ़ावा दिया जा रहा है।
परिवार के साथ खड़ी सरकार
ममता बनर्जी ने मृतक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह पहली घटना नहीं है जब अन्य राज्यों में बंगाली प्रवासी मजदूरों के साथ हिंसा हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार पर भी इस तरह की घटनाओं को लेकर उदासीन रहने का आरोप लगाया।
सुखन महतो हत्या मामला
पुलिस के अनुसार, 24 वर्षीय सुखन महतो पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के निवासी थे और वर्ष 2021 से पुणे में काम कर रहे थे। वह कोरेगांव भीमा क्षेत्र में एक कार पुर्जे बनाने वाली इकाई में कार्यरत थे और अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।
बुधवार को उनका शव शिकरपुर थाना क्षेत्र से बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उन्हें कथित रूप से बंगाली भाषा बोलने के कारण पीटा गया और उनकी हत्या कर दी गई।
मृतक के बड़े भाई तुलसीराम महतो की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान कर जल्द ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।
यह घटना प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिस पर अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।



