मुंबई, 30 मार्च (वेब वार्ता)। महाराष्ट्र के सतारा जिले में जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। चुनाव परिणाम के बाद गठबंधन में दरार के संकेत मिल रहे हैं और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रिया शिंदे ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की, जबकि शिवसेना-राष्ट्रवादी कांग्रेस गठबंधन के पास संख्या बल अधिक होने के बावजूद हार का सामना करना पड़ा। भाजपा ने महज दो वोटों के अंतर से जीत हासिल की, जिससे राजनीतिक समीकरणों पर सवाल उठने लगे हैं।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एकनाथ शिंदे ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन ने चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के लिए सत्ता का दुरुपयोग किया।
वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
चुनाव प्रक्रिया के दौरान यह भी आरोप सामने आए कि मतदान से पहले कुछ निर्वाचित सदस्यों को कथित रूप से पुलिस द्वारा हटाया गया। शिवसेना के शंभुराज देसाई और राष्ट्रवादी कांग्रेस के मकरंद पाटिल ने भी पुलिस पर दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं।
इस पूरे मामले में तुषार दोशी की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। बताया जा रहा है कि एक निर्वाचित सदस्य के खिलाफ पुराने मामले को आधार बनाकर कार्रवाई की गई।
विवाद बढ़ने के बाद नीलम गोरहे ने सतारा पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी को निलंबित करने के निर्देश दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम महायुति सरकार के भीतर मतभेदों को उजागर कर सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और तेज होने की संभावना है, जबकि सभी की नजरें अब जांच के परिणाम पर टिकी हैं।



