कोलकाता, 30 मार्च (वेब वार्ता)। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण कार्य में कथित कदाचार के आरोपों के चलते सात अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई मतदाता सूची अद्यतन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
आयोग के अनुसार, निलंबित सभी अधिकारी सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के रूप में कार्यरत थे और मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य में लगे हुए थे। इन पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है।
आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उनके कैडर नियंत्रक प्राधिकरणों के माध्यम से शीघ्र अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। साथ ही, इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी आयोग को उपलब्ध कराने को भी कहा गया है।
किन अधिकारियों पर गिरी गाज
निलंबित अधिकारियों में डॉ. सफी उर्रहमान, नीतीश दास, डालिया रे चौधरी, एसके मुर्शिद आलम, सत्यजीत दास, जॉयदीप कुंडू और देबाशीष बिस्वास शामिल हैं।
क्या है कानूनी प्रावधान
आयोग ने यह कार्रवाई जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13सीसी के तहत की है। इस प्रावधान के अनुसार, चुनावी कार्यों में लगे अधिकारियों पर आयोग का नियंत्रण होता है और आवश्यकता पड़ने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
गौरतलब है कि बूथ स्तर अधिकारी और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी आमतौर पर राज्य सरकार के कर्मचारी होते हैं, जिन्हें चुनावी कार्यों के लिए प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया जाता है।
इस कार्रवाई को चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या कदाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



