मिडिल ईस्ट, 30 मार्च (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि रूस ने ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले के लिए खुफिया सहायता प्रदान की। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
जेलेंस्की के अनुसार, सऊदी अरब में स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमले से पहले रूस ने ईरान को महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई थी। उन्होंने दावा किया कि रूसी उपग्रहों ने 20, 23 और 25 मार्च को इस सैन्य अड्डे की तस्वीरें ली थीं, जिसके बाद 26 मार्च को हमला किया गया। इस हमले में कई अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की बात भी सामने आई है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि किसी सैन्य ठिकाने की बार-बार उपग्रह तस्वीरें लेना सामान्य प्रक्रिया नहीं होती और यह संभावित हमले की तैयारी का संकेत हो सकता है। हालांकि, उनके इन दावों के समर्थन में अब तक कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है।
दूसरी ओर, सर्गेई लावरोव पहले ही ऐसे आरोपों को खारिज कर चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि रूस ईरान के साथ खुफिया जानकारी साझा नहीं कर रहा, हालांकि दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग होने की बात उन्होंने स्वीकार की है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब जेलेंस्की खाड़ी देशों के दौरे पर हैं और यूक्रेन के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ईरानी हमलों का सामना कर रहे देशों को वायु रक्षा और ड्रोन युद्ध से जुड़े अनुभव साझा करने की भी पेशकश की है।
जेलेंस्की ने यह भी चिंता जताई कि पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष यूक्रेन के लिए आवश्यक अमेरिकी सैन्य सहायता को प्रभावित कर सकता है। क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता के कारण रक्षा प्रणालियों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे संसाधनों का दबाव बढ़ सकता है।
मौजूदा परिस्थितियों में यह मुद्दा वैश्विक राजनीति का केंद्र बनता जा रहा है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में और अधिक तनाव पैदा हो सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें इस मामले पर टिकी हैं और आगे की घटनाओं का इंतजार किया जा रहा है।



