नई दिल्ली, 29 मार्च (वेब वार्ता)। राजधानी के जंतर मंतर पर रविवार को ट्रांसजेंडर समुदाय और उनके समर्थकों ने ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक’ के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधन उनके अधिकारों की रक्षा करने के बजाय उन्हें कमजोर करता है।
प्रदर्शन में देशभर से ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता और मानवाधिकार संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने कहा कि विधेयक में आत्म-पहचान के अधिकार को लेकर स्पष्टता नहीं है, जिससे समुदाय के लोगों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जांच के दायरे में आना पड़ सकता है। हालांकि कुछ संशोधन किए गए हैं, लेकिन समुदाय का कहना है कि वे अभी भी संतोषजनक नहीं हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस विधेयक को वापस लेने या उसमें व्यापक बदलाव करने की मांग की। उनका कहना है कि यह विधेयक उनके जीवन, गरिमा और समान अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर विशेष आपत्ति जताई गई। समुदाय के अनुसार, इसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए शिक्षा और रोजगार में आरक्षण का प्रावधान नहीं है। साथ ही, यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में दंड के प्रावधानों को लेकर भी असमानता का आरोप लगाया गया, जिसे उन्होंने भेदभावपूर्ण बताया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में आत्म-पहचान के अधिकार को पूर्ण मान्यता देना, शिक्षा और रोजगार में आरक्षण सुनिश्चित करना तथा यौन अपराधों के लिए समान दंड व्यवस्था लागू करना शामिल है। इसके अलावा, भीख मांगने को अपराध मानने वाले प्रावधानों को हटाने की भी मांग उठाई गई। समुदाय ने सरकार से आग्रह किया कि वह उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुने और ऐसा कानून बनाए, जो उनके संवैधानिक अधिकारों और सम्मानजनक जीवन की गारंटी सुनिश्चित कर सके।



