कोलकाता, 29 मार्च (वेब वार्ता)। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच राज्य सरकार द्वारा स्टेट कॉन्स्टीट्यूटेड सेवाओं में अतिरिक्त पद सृजित करने के फैसले पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे लेकर सवाल खड़े किए हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में घोषणा की थी कि राज्य कैबिनेट ने नौ सेवाओं में विभिन्न वेतन स्तरों पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त पद बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। उन्होंने इस निर्णय को प्रशासनिक मजबूती और अनुभवी अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम बताया। साथ ही अन्य सेवाओं में भी इसी तरह के प्रावधान को सैद्धांतिक मंजूरी देने की बात कही।
इस फैसले पर भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम वास्तविक सुधार नहीं, बल्कि अधिकारियों को भ्रमित करने की कोशिश है। उनके अनुसार, सरकार इसे ऐतिहासिक सुधार बताकर पेश कर रही है, जबकि यह बहुत देर से और सीमित स्तर पर उठाया गया कदम है।
अमित मालवीय ने कहा कि राज्य के अधिकारियों को लंबे समय से वित्तीय नुकसान, पदोन्नति में देरी और प्रशासनिक असुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल ढांचागत बदलाव दिखाकर सुधार का माहौल बनाना चाहती है, जबकि मूल समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
भाजपा नेता ने महंगाई भत्ते के मुद्दे को भी उठाते हुए कहा कि लंबित भुगतान के कारण अधिकारियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। उनके अनुसार, प्रारंभिक स्तर के अधिकारियों को प्रतिवर्ष लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि वरिष्ठ स्तर पर यह राशि और अधिक है। उन्होंने कहा कि जब तक बकाया महंगाई भत्ता नहीं दिया जाता, तब तक सुधार के दावे विश्वसनीय नहीं माने जा सकते।
इसके अलावा, उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति में देरी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि अन्य राज्यों की तुलना में पश्चिम बंगाल में पदोन्नति प्रक्रिया धीमी है, जिससे कई अधिकारी आयु सीमा पार कर जाने के कारण पदोन्नति से वंचित रह जाते हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के बीच आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में और तीखापन आने की संभावना जताई जा रही है।



