नई दिल्ली, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता
छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। Chhattisgarh Naxal Surrender के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 108 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इन सभी नक्सलियों पर मिलाकर लगभग 3.95 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। अधिकारियों के अनुसार यह घटना नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे सुरक्षा अभियानों और पुनर्वास नीतियों की सफलता का संकेत मानी जा रही है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि Chhattisgarh Naxal Surrender की यह घटना केंद्र सरकार के ‘नक्सल मुक्त भारत अभियान’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस प्रकार के आत्मसमर्पण से नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति स्थापित करने और विकास कार्यों को गति देने में मदद मिलेगी।
- छत्तीसगढ़ में 108 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
- इन पर कुल 3.95 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था
- बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा समेत कई जिलों के नक्सली शामिल
- सरकार के नक्सल मुक्त भारत अभियान को मिली बड़ी सफलता
Chhattisgarh Naxal Surrender: कई जिलों के नक्सलियों ने छोड़ा हथियार
अधिकारियों के अनुसार Chhattisgarh Naxal Surrender के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली राज्य के कई जिलों से संबंधित हैं। इनमें बीजापुर के 37, नारायणपुर के 4, बस्तर के 16, कांकेर के 3, सुकमा के 18 और दंतेवाड़ा के 30 नक्सली शामिल हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इन इलाकों को लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नक्सलियों का आत्मसमर्पण करना सुरक्षा बलों की रणनीति और सरकार की पुनर्वास नीति की सफलता को दर्शाता है।
नक्सल मुक्त भारत अभियान को मिली मजबूती
केंद्र सरकार लंबे समय से नक्सलवाद के खिलाफ व्यापक अभियान चला रही है। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित ‘नक्सल मुक्त भारत अभियान’ के तहत सुरक्षा बलों की कार्रवाई और विकास योजनाओं को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Chhattisgarh Naxal Surrender की यह घटना सरकार के उस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अहम कदम है, जिसके तहत 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सुरक्षाबलों की कार्रवाई और पुनर्वास नीति का असर
सरकारी अधिकारियों के अनुसार सुरक्षाबल लगातार नक्सलियों के कोर इलाकों में अभियान चला रहे हैं। इन अभियानों के दौरान कई मुठभेड़ों में नक्सली नेटवर्क कमजोर हुआ है, जिससे बड़ी संख्या में माओवादी संगठन के सदस्य हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि Chhattisgarh Naxal Surrender केवल सुरक्षा कार्रवाई का परिणाम नहीं है, बल्कि सरकार की पुनर्वास नीति का भी असर है, जिसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर दिया जाता है।
राज्य सरकार ने बताया बड़ी सफलता
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस घटना का स्वागत करते हुए इसे सुरक्षा अभियान की बड़ी सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि Chhattisgarh Naxal Surrender से यह स्पष्ट होता है कि बड़ी संख्या में लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं।
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