नई दिल्ली, अन्तर्राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
Trump Iran Strategy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ चल रही अमेरिकी रणनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ईरान के खिलाफ कई महत्वपूर्ण जीत हासिल की हैं, लेकिन “आखिरी जीत अभी बाकी है।”
ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच सैन्य गतिविधियां तेज होती जा रही हैं।
- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का ईरान को लेकर बड़ा बयान
- Trump Iran Strategy के तहत कहा – ‘आखिरी जीत अभी बाकी’
- ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता खत्म करने का दावा
- पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान-इजरायल के बीच बढ़ा तनाव
ईरान की सैन्य क्षमता पर किया दावा
डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को काफी हद तक नष्ट कर दिया गया है। उनके अनुसार ईरान के पास अब बहुत कम लॉन्चर बचे हैं और उसकी सैन्य ताकत कमजोर हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि Trump Iran Strategy के तहत अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने ईरान के खिलाफ कई रणनीतिक कदम उठाए हैं, जिनसे उसे बड़ा नुकसान हुआ है।
फारस की खाड़ी में रणनीति का खुलासा
ट्रम्प ने फारस की खाड़ी में ईरान को खत्म करने की योजना का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि जल्द ही यह खतरा पूरी तरह समाप्त हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Trump Iran Strategy को लेकर दिया गया यह बयान पश्चिम एशिया की मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना सकता है।
- ईरान के खिलाफ कई महत्वपूर्ण जीत का दावा
- मिसाइल और ड्रोन क्षमता खत्म करने की बात
- फारस की खाड़ी में रणनीतिक कार्रवाई का संकेत
- ‘आखिरी जीत’ अभी बाकी होने का दावा
इजरायल के साथ मिलकर कार्रवाई
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका अपने सहयोगी इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि संयुक्त अभियान के जरिए ईरान को कमजोर किया जा रहा है।
हालांकि दूसरी ओर ईरान ने भी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ अपनी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
- ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच सैन्य गतिविधियां तेज
- क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं
- वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है असर
- भू-राजनीतिक तनाव से ऊर्जा बाजार भी प्रभावित
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों की दिशा पर दुनिया की नजर बनी हुई है।







