नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क | वेब वार्ता
Crude Oil Price Drop: वैश्विक बाजार में मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 8.5 प्रतिशत गिरकर लगभग 92.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी बाजार में भी तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार Crude Oil Price Drop की यह स्थिति वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में कमी की उम्मीद और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती आपूर्ति के संकेतों के कारण देखने को मिल रही है।
- वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट
- Crude Oil Price Drop के बीच ब्रेंट क्रूड 8.5% गिरा
- अमेरिकी बाजार में तेल की कीमत करीब 9% नीचे
- ब्रेंट क्रूड की कीमत 92.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास
अमेरिकी बाजार में भी कीमतों में गिरावट
अमेरिकी बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी क्रूड की कीमत लगभग 9 प्रतिशत गिरकर करीब 88.60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि Crude Oil Price Drop के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में कुछ राहत के संकेत दिखाई दे रहे हैं, हालांकि कीमतें अभी भी पिछले महीनों की तुलना में ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
संघर्ष के शुरुआती स्तर से अभी भी महंगा तेल
हालांकि हालिया गिरावट के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें अभी भी संघर्ष की शुरुआत में मौजूद स्तर से लगभग 30 प्रतिशत अधिक बनी हुई हैं। इसका मतलब है कि ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं तो आने वाले दिनों में Crude Oil Price Drop का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ईंधन कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
- पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद
- वैश्विक बाजारों में आपूर्ति बढ़ने के संकेत
- निवेशकों की मुनाफावसूली
- ऊर्जा बाजार में मांग को लेकर अनिश्चितता
ट्रंप के बयान के बाद बाजार में नरमी
बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद बाजार में गिरावट आई, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के साथ जंग जल्द समाप्त हो सकती है। इस बयान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में निवेशकों का रुख बदल गया और कीमतों में गिरावट देखने को मिली।
- कच्चे तेल की कीमत घटने से ईंधन कीमतों पर दबाव कम हो सकता है
- मुद्रास्फीति पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना
- ऊर्जा आयात बिल में संभावित कमी
- भारतीय शेयर बाजार को मिल सकता है समर्थन
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट जारी रहती है तो इसका सकारात्मक प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत जैसे तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।







