वाराणसी, अजय कुमार | वेब वार्ता
विंध्यवासिनी धाम से श्री काशी विश्वनाथ को लस्सी की पावन भेंट शनिवार को उस समय प्राप्त हुई जब वसंत ऋतु के समापन और फाल्गुन मास के आरंभ के साथ काशी में ग्रीष्म ऋतु का प्रभाव प्रारंभ होने लगा है। भगवान को शीतलता प्रदान करने की श्रद्धा भावना से विंध्याचल स्थित विंध्यवासिनी धाम से विशेष रूप से लस्सी अर्पित की गई, जिसे मंदिर प्रशासन ने पूर्ण सम्मान के साथ स्वीकार किया। यह आयोजन सनातन परंपरा, आस्था और धार्मिक समन्वय का जीवंत उदाहरण माना जा रहा है।
विंध्यवासिनी धाम से श्री काशी विश्वनाथ को लस्सी की पावन भेंट: आस्था की अभिव्यक्ति
धार्मिक मान्यता है कि ऋतु परिवर्तन के साथ भगवान को शीतल और ताजगी प्रदान करने वाले भोग अर्पित किए जाते हैं। इसी परंपरा के तहत विंध्यवासिनी धाम से श्री काशी विश्वनाथ को लस्सी की पावन भेंट भेजी गई। फाल्गुन मास के आगमन के साथ जब तापमान में वृद्धि होने लगती है, तब भगवान को शीतल पेय अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि यह केवल एक भोग नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच प्रेम, समर्पण और सेवा भाव का प्रतीक है।
डिप्टी कलेक्टर शंभू शरण की उपस्थिति में अर्पण
मंदिर के डिप्टी कलेक्टर श्री शंभू शरण ने इस पावन भेंट को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया। उन्होंने स्वयं गर्भगृह में उपस्थित होकर बाबा विश्वनाथ को श्रद्धा सहित लस्सी अर्पित कराई। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न यह आयोजन विधि-विधान और मर्यादा के अनुरूप सम्पन्न हुआ।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भेंट | लस्सी (शीतल पेय) |
| प्रेषक धाम | विंध्यवासिनी धाम, विंध्याचल |
| प्राप्त स्थान | श्री काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी |
| अर्पण की उपस्थिति | डिप्टी कलेक्टर श्री शंभू शरण |
| अवसर | वसंत ऋतु समापन एवं फाल्गुन मास आरंभ |
सनातन परंपरा और धार्मिक संबंधों का संदेश
विंध्यवासिनी धाम से श्री काशी विश्वनाथ को लस्सी की पावन भेंट केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि दो प्रमुख तीर्थ स्थलों के बीच आध्यात्मिक संबंधों की सुदृढ़ता का प्रतीक है। यह आयोजन दर्शाता है कि सनातन परंपरा में ऋतु, प्रकृति और भक्ति का गहरा संबंध है।
धाम प्रशासन ने कहा कि परंपराओं के संरक्षण और श्रद्धालुओं की भावनाओं के सम्मान के लिए वे सदैव प्रतिबद्ध हैं। इस प्रकार के आयोजन भक्तों में उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं।
भक्तों में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण
भक्तों ने इस पावन अवसर को विशेष आस्था के साथ देखा। उनका कहना है कि ऋतु परिवर्तन के साथ इस प्रकार की भेंट भगवान के प्रति स्नेह और समर्पण का परिचायक है। काशी में ग्रीष्म प्रभाव की शुरुआत के साथ यह आयोजन धार्मिक वातावरण को और अधिक भावपूर्ण बना गया।
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