नई दिल्ली, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता
खाड़ी तनाव पर भारत की प्रतिक्रिया के तहत भारत सरकार ने मध्य-पूर्व विशेषकर खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की है। 28 फरवरी को जारी आधिकारिक बयान में विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम बरतने, स्थिति को और न बढ़ाने तथा नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है।
खाड़ी तनाव पर भारत की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब इजरायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेज हो गया है। क्षेत्र में जारी हमलों और जवाबी कार्रवाई से वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी है। भारत ने कहा है कि वह स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहा है।
विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान
विदेश मंत्रालय ने अपने वक्तव्य में कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। भारत ने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे तनाव को और बढ़ाने वाले कदमों से बचें। मंत्रालय ने दोहराया कि किसी भी प्रकार का सैन्य विस्तार व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बन सकता है।
- सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील
- नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता
- संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाने पर जोर
- भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह
भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी
खाड़ी तनाव पर भारत की प्रतिक्रिया के साथ ही खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और स्थानीय दूतावासों के संपर्क में बने रहने की सलाह दी गई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि स्थिति में बदलाव होने पर आवश्यक दिशा-निर्देश समय-समय पर जारी किए जाएंगे।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| तारीख | 28 फरवरी |
| जारीकर्ता | भारत का विदेश मंत्रालय |
| मुख्य अपील | संयम और कूटनीतिक समाधान |
| नागरिकों के लिए निर्देश | सतर्क रहें, दूतावास से संपर्क रखें |
इजरायल-ईरान के बीच बढ़ता टकराव
इस बीच इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष तेज हो गया है। इजरायल की कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी कदम उठाते हुए इजरायल के हाइफा शहर को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं। इजरायल की ‘आयरन डोम’ रक्षा प्रणाली ने अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया। हालांकि, क्षेत्र में लगातार सायरन बजने और लोगों को बंकर में रहने की सलाह दिए जाने से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
वैश्विक प्रभाव और भारत की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और वैश्विक बाजारों पर प्रभाव पड़ सकता है। भारत, जो खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात पर निर्भर है, स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है। खाड़ी तनाव पर भारत की प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली कूटनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए अपने रणनीतिक हितों और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है।
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