नई दिल्ली, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता
अंतरराष्ट्रीय उड़ान सतर्कता समीक्षा के तहत ईरान पर अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के बीच भारत सरकार ने हवाई सेवाओं की सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शुक्रवार को उच्च स्तरीय बैठक कर मध्य-पूर्व क्षेत्र में बदलते हालात का भारतीय उड़ानों पर संभावित प्रभाव का आकलन किया। बैठक में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शामिल हुए। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सरकार द्वारा की गई अंतरराष्ट्रीय उड़ान सतर्कता समीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एयरस्पेस प्रतिबंधों, NOTAM (नोटिस टू एयरमैन) और संभावित डायवर्जन की स्थिति में भारतीय एयरलाइंस पूरी तरह तैयार रहें। इसके लिए सभी संबंधित एजेंसियों को समन्वय बढ़ाने और रियल-टाइम मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं।
उच्च स्तरीय बैठक में क्या हुआ फैसला
बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA), विभिन्न एयरलाइंस और प्रमुख एयरपोर्ट ऑपरेटरों ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र बिंदु यात्रियों की सुरक्षा, परिचालन की निरंतरता और समन्वय तंत्र को मजबूत बनाना रहा।
- एयरस्पेस एडवाइजरी पर लगातार निगरानी
- जरूरत पड़ने पर उड़ानों का रीरूट या डायवर्जन
- प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों को ऑपरेशनल अलर्ट
- क्रू ड्यूटी टाइम और सुरक्षा नियमों की सख्त निगरानी
एयरपोर्ट और एयरलाइंस के लिए विशेष निर्देश
अंतरराष्ट्रीय उड़ान सतर्कता समीक्षा के तहत देश के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। संभावित डायवर्जन की स्थिति में यात्रियों की सुविधाओं, आवास और ट्रांजिट व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंधन योजना तैयार की गई है। एयरलाइंस को निर्देश दिया गया है कि वे NOTAM और एयरस्पेस प्रतिबंधों पर नियमित अपडेट लें और यात्रियों को समय पर जानकारी दें।
| एजेंसी | जिम्मेदारी |
|---|---|
| नागरिक उड्डयन मंत्रालय | समीक्षा और समन्वय |
| DGCA | सुरक्षा मानकों और क्रू ड्यूटी टाइम की निगरानी |
| AAI | एयरपोर्ट परिचालन प्रबंधन |
| एयरलाइंस | रीरूट/डायवर्जन और यात्री सूचना |
विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय
मंत्रालय ने पुष्टि की है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विदेश मंत्रालय के साथ भी लगातार संपर्क बनाए रखा गया है। यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आवश्यक सहायता के लिए संयुक्त रणनीति अपनाई जाएगी।
यात्रियों के लिए सलाह
सरकार ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी-अपनी एयरलाइंस से नियमित संपर्क में रहें और यात्रा से पहले उड़ान की स्थिति की पुष्टि कर लें। अंतरराष्ट्रीय उड़ान सतर्कता समीक्षा के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में यात्रियों को न्यूनतम असुविधा हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक विमानन क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में भारत की सतर्कता और त्वरित समन्वय रणनीति संभावित व्यवधानों को कम करने में सहायक साबित हो सकती है।
ये भी पढ़ें: इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला, तेहरान में धमाके; US की भूमिका पर भी चर्चा







