वाराणसी, अजय कुमार | वेब वार्ता
काशी में रंगभरी एकादशी के पावन अवसर पर शुक्रवार (27 फरवरी) को बाबा विश्वनाथ धाम में होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत होगी। महाशिवरात्रि पर विवाह के बाद भगवान शंकर आज माता गौरा का गौना कराकर काशी पधारेंगे। परंपरा के अनुसार चल प्रतिमा के साथ अबीर-गुलाल और पुष्पों की होली खेली जाएगी। इस वर्ष आयोजन को विशेष स्वरूप देते हुए ब्रज के रसियारों द्वारा ‘रास’ एवं ‘फूलों की होली’ का मंचन भी होगा। मंदिर न्यास और पुलिस प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुगमता के लिए विस्तृत तैयारियां पूरी कर ली हैं।
काशी में रंगभरी एकादशी: परंपरा और उल्लास
महाशिवरात्रि के बाद रंगभरी एकादशी वह दिन है जब देवाधिदेव भगवान शंकर माता पार्वती का गौना कराकर काशी लाते हैं। पूर्व महंत आवास से हर-हर महादेव के उद्घोष और डमरू दल के नाद के साथ चल प्रतिमा निकलती है। काशीवासी बाबा के भाल पर गुलाल लगाकर और माता के चरणों में अबीर अर्पित कर होली खेलने की अनुमति मांगते हैं। इसी के साथ काशी में होली पर्व का शुभारंभ माना जाता है।
ब्रज-काशी सांस्कृतिक समन्वय का विशेष आयोजन
काशी में रंगभरी एकादशी के अवसर पर इस बार ‘शिवार्चनम मंच’ से पहली बार ब्रज के रसियारों द्वारा ‘रास’ और ‘फूलों की होली’ का भव्य आयोजन होगा। श्री काशी विश्वनाथ धाम और श्री कृष्ण जन्मस्थान, मथुरा के मध्य उपहारों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की परंपरा भी निभाई जा रही है, जो ब्रज और काशी की प्राचीन धार्मिक एकता को सुदृढ़ करती है।
| आयोजन | विवरण |
|---|---|
| चल प्रतिमा प्रवेश | सीमित संख्या (64 श्रद्धालु) के साथ |
| सांस्कृतिक कार्यक्रम | ब्रज रसिया मंडली द्वारा रास एवं फूलों की होली |
| समय | रात्रि 10 बजे तक |
| प्रसाद व्यवस्था | ठंडई एवं सूक्ष्म जलपान |
व्यवस्थाओं का सुदृढ़ीकरण
मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं संयुक्त निदेशक, धर्मार्थ कार्य विभाग विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि सुरक्षा और व्यवस्थाओं को व्यापक स्तर पर सुदृढ़ किया गया है। संकरी गलियों को ध्यान में रखते हुए पुलिस एवं महंत परिवार की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि चल प्रतिमा के साथ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 64 तक सीमित रहेगी। गर्भगृह में सप्तऋषि आरती और अन्य अनुष्ठान विधिवत संपन्न होंगे।
देश-विदेश से उपहारों की परंपरा
महाशिवरात्रि पर देश-विदेश के 63 प्रमुख मंदिरों से पावन भेंट प्राप्त हुई थी। इनमें श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड, जम्मू, श्री केदारनाथ, उत्तराखंड, श्री सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई, द्वारकाधीश मंदिर, गुजरात सहित कई प्रतिष्ठित धाम शामिल रहे। यह नवाचार अब रंगभरी एकादशी और आगामी श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर भी निभाने की तैयारी है, जहां 50 से अधिक मंदिरों से भेंट आने की संभावना है।
- ज्योतिर्लिंगों व सिद्धपीठों से पावन प्रसाद
- पूजित वस्त्र, रज एवं पवित्र जल
- सांस्कृतिक समन्वय के प्रतीक उपहार
- “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को बल
श्रद्धालुओं के लिए आमंत्रण
मंदिर न्यास द्वारा श्रद्धालुओं को अपने महादेव की चल प्रतिमा के साथ अबीर, गुलाल और पुष्पों की होली खेलने के लिए आमंत्रित किया गया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अनुशासन और परंपरा का पालन करने की अपील की है, ताकि उत्सव शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके।
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