ललितपुर, आलोक चतुर्वेदी | वेब वार्ता
तमिलनाडु एक्सप्रेस में छात्रा से छेड़छाड़ के आरोप ने एक बार फिर चलती ट्रेन में यात्री सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। गाड़ी संख्या 12622 में नई दिल्ली से चेन्नई जा रही 23 वर्षीय छात्रा ने आरोप लगाया है कि सफर के दौरान आईआरसीटीसी की वर्दी पहने दो वेंडरों ने उसके साथ गलत हरकत की। घटना 25 दिसंबर की सुबह झांसी पार करने के बाद की बताई जा रही है, जबकि मामला 26 फरवरी 2026 को जीआरपी ललितपुर में दर्ज हुआ। इस प्रकरण ने वेंडर सत्यापन, ऑनबोर्ड निगरानी और शिकायत तंत्र की गति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तमिलनाडु एक्सप्रेस में छात्रा से छेड़छाड़: क्या है पूरा घटनाक्रम
चेन्नई निवासी छात्रा के अनुसार वह 24 दिसंबर को नई दिल्ली से चेन्नई के लिए रवाना हुई थी। उसने जीआरपी को दी तहरीर में बताया कि 25 दिसंबर की सुबह करीब 03:30 से 05:30 बजे के बीच, जब ट्रेन झांसी स्टेशन पार कर आगे बढ़ रही थी, उसी दौरान यह घटना हुई। छात्रा का आरोप है कि वह अपनी सीट पर सो रही थी, तभी आईआरसीटीसी की नीली वर्दी पहने चाय विक्रेता ने उसे गलत नियत से छुआ। कुछ ही देर बाद एक अन्य वेंडर ने भी अश्लील हरकत की।
विरोध करने पर दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए। पीड़िता ने दावा किया है कि वह आरोपियों की पहचान कर सकती है।
देर से दर्ज हुई एफआईआर, उठे प्रक्रिया पर सवाल
घटना 25 दिसंबर 2025 की बताई गई है, जबकि जीआरपी ललितपुर में मुकदमा 26 फरवरी 2026 को दर्ज किया गया। लगभग दो माह के अंतर ने शिकायत प्रणाली और पुलिस प्रतिक्रिया की गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जीआरपी ने बीएनएस 2023 की धारा 75 के तहत एफआईआर संख्या 0019 दर्ज कर जांच उपनिरीक्षक राजेश सिंह को सौंपी है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| ट्रेन | गाड़ी संख्या 12622, तमिलनाडु एक्सप्रेस |
| घटना की तारीख | 25 दिसंबर 2025 |
| एफआईआर दर्ज | 26 फरवरी 2026, जीआरपी ललितपुर |
| धारा | बीएनएस 2023 की धारा 75 |
| जांच अधिकारी | उपनिरीक्षक राजेश सिंह |
वेंडर सत्यापन और ऑनबोर्ड सुरक्षा पर प्रश्न
तमिलनाडु एक्सप्रेस में छात्रा से छेड़छाड़ की घटना ने रेलवे में सेवा देने वाले कर्मियों के पुलिस सत्यापन और पहचान प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यदि अधिकृत वर्दी में मौजूद कर्मियों पर ही आरोप लग रहे हैं, तो यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनाए गए प्रोटोकॉल की समीक्षा आवश्यक हो जाती है।
- क्या सभी ऑनबोर्ड वेंडरों का नियमित पुलिस वेरिफिकेशन होता है?
- ट्रेन के भीतर निगरानी तंत्र कितना सक्रिय है?
- महिला यात्रियों के लिए सुरक्षा उपाय पर्याप्त हैं या नहीं?
- शिकायत दर्ज करने और कार्रवाई की प्रक्रिया में देरी क्यों?
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में ऑनबोर्ड सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी और मानव संसाधन दोनों स्तरों पर सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
रेलवे प्रशासन के लिए चेतावनी संकेत
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना भर नहीं, बल्कि यात्री सुरक्षा ढांचे की संभावित कमजोरी का संकेत माना जा रहा है। यात्रियों का भरोसा बनाए रखना रेलवे प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां आरोपियों तक कितनी जल्दी पहुंचती हैं और रेलवे प्रशासन वेंडर स्क्रीनिंग तथा ट्रेन सुरक्षा प्रोटोकॉल में क्या ठोस सुधार करता है।
यात्रियों के लिए सलाह
यदि किसी यात्री के साथ ट्रेन में ऐसी कोई घटना होती है, तो तत्काल रेलवे हेल्पलाइन 139 या रेलवे सुरक्षा हेल्पलाइन 182 पर शिकायत दर्ज कराना प्रभावी कदम माना जाता है। इसके अतिरिक्त टीटीई या ऑनबोर्ड स्टाफ को तुरंत सूचित करना भी आवश्यक है।
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