वाराणसी, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता
अविमुक्तेश्वरानंद यौन उत्पीड़न मामला में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई निर्धारित है। इससे पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए आरोपों को निराधार बताया और कहा कि “झूठ की कलई खुलनी शुरू हो गई है।” उन्होंने कहा कि न्यायालय के समक्ष वे अपना पक्ष और साक्ष्य रख चुके हैं तथा उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा है। अविमुक्तेश्वरानंद यौन उत्पीड़न मामला पिछले कुछ समय से चर्चा में है।
अविमुक्तेश्वरानंद यौन उत्पीड़न मामला: अदालत में आज सुनवाई
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि उनके अधिवक्ता अदालत में विस्तृत दलीलें प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने दावा किया कि वे सभी आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार, इतने समय बाद कराई गई मेडिकल रिपोर्ट की प्रासंगिकता पर भी प्रश्न उठते हैं। उन्होंने कहा कि आरोपों की जांच तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि न्यायालय अपने विवेक से निर्णय देगा और उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है। साथ ही यह भी जोड़ा कि विरोधी पक्ष की ओर से न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास किए जा सकते हैं, लेकिन सत्य अंततः सामने आएगा।
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज पर टिप्पणी
अविमुक्तेश्वरानंद यौन उत्पीड़न मामला में स्वामी ने आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संबंधित बच्चे उनके संपर्क में कभी नहीं आए और उनके नाम को इस प्रकरण से जोड़ना सरल नहीं है। उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि बच्चों को होटल में क्यों रखा गया और उन्हें मीडिया से मिलने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है।
स्वामी ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी के पास ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने एक कहावत का उल्लेख करते हुए कहा कि “बंद तो लाख की और खुल गई तो खाक की”, जिसका आशय यह था कि यदि आरोपों में दम है तो उन्हें सार्वजनिक रूप से साबित किया जाए।
कानूनी प्रक्रिया पर नजर
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| मामला | यौन उत्पीड़न से संबंधित आरोप |
| याचिका | अग्रिम जमानत |
| सुनवाई | इलाहाबाद हाईकोर्ट |
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अविमुक्तेश्वरानंद यौन उत्पीड़न मामला में अदालत साक्ष्यों और प्रस्तुत दलीलों के आधार पर निर्णय लेगी। फिलहाल सभी पक्षों की दलीलें सुनी जानी बाकी हैं। सुनवाई के बाद अदालत का आदेश आगे की दिशा तय करेगा।
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