Tuesday, February 24, 2026
व्हाट्सएप पर हमसे जुड़ें

बंगाल की सियासत के चाणक्य मुकुल रॉय का निधन, रणनीति और संगठन की राजनीति का एक युग समाप्त

कोलकाता/नई दिल्ली, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता

बंगाल की राजनीति में रणनीति, संगठन और सत्ता संतुलन के सबसे बड़े शिल्पकार माने जाने वाले मुकुल रॉय ने 23 फरवरी 2026 को 71 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह दिया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे मुकुल रॉय के निधन से पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा। उन्हें यूं ही “बंगाल की सियासत का चाणक्य” नहीं कहा जाता था, बल्कि चुनावी रणनीति, संगठन निर्माण और राजनीतिक समीकरण साधने में उनकी पकड़ असाधारण थी।

उनका जीवन राजनीति की उस पाठशाला का उदाहरण रहा, जहां संघर्ष, धैर्य, रिश्ते और रणनीति—चारों का संतुलन जरूरी होता है। मुकुल रॉय की राजनीतिक यात्रा केवल सत्ता तक पहुंचने की कहानी नहीं, बल्कि संगठन गढ़ने और नेतृत्व खड़ा करने की मिसाल भी रही।

यूथ कांग्रेस से तृणमूल तक का सफर

मुकुल रॉय ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत यूथ कांग्रेस से की। शुरुआती दौर में ही उनकी संगठन क्षमता और नेतृत्व कौशल सामने आने लगा था। बाद में उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।

तृणमूल कांग्रेस को जमीनी स्तर पर खड़ा करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और पार्टी को चुनावी मशीनरी में बदलने में मुकुल रॉय का योगदान निर्णायक रहा। बूथ स्तर से लेकर राज्य स्तर तक संगठन खड़ा करना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक था।

2009 का चुनाव और रणनीतिक कौशल

वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की ऐतिहासिक सफलता के पीछे मुकुल रॉय की रणनीति को अहम माना जाता है। अप्रत्याशित सीटें जीतने के बाद सांसदों के समन्वय, स्वागत और संगठनात्मक प्रबंधन की जिम्मेदारी उन्होंने अपने विश्वसनीय सहयोगियों को सौंपी।

इस दौर में मीडिया और राजनीतिक संपर्कों को मजबूत करना उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा रहा। वे संबंधों को केवल औपचारिक नहीं, बल्कि विश्वास की नींव पर खड़ा करते थे।

वेब वार्ता से जुड़ा भरोसे का रिश्ता

मुकुल रॉय के जीवन में पत्रकारिता और मीडिया से जुड़े संबंध भी विशेष महत्व रखते थे। लोकसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण और राजनीतिक संवाद में वेब वार्ता समाचार एजेंसी से उनका संपर्क बना, जो आगे चलकर मित्रता में बदल गया।

राजेश पांडे जैसे नेताओं को टिकट दिलाने में उनकी भूमिका और सहयोग, उनके भरोसेमंद स्वभाव को दर्शाता है। वे अपने संपर्कों को केवल राजनीतिक साधन नहीं, बल्कि रिश्तों की तरह निभाते थे।

दिल्ली में संगठन और नेतृत्व की भूमिका

दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस की बैठकों, सांसदों के स्वागत और रणनीतिक बैठकों की जिम्मेदारी भी मुकुल रॉय ने अपने भरोसेमंद लोगों को सौंपी। फिरोजशाह रोड स्थित वरिष्ठ नेता शिशिर अधिकारी के आवास पर आयोजित बैठकों में उनकी भूमिका बेहद प्रभावशाली रही।

यह दौर उनके राजनीतिक कद और विश्वसनीयता का प्रतीक था, जब पार्टी का केंद्रीय प्रबंधन काफी हद तक उनके भरोसे चलता था।

सारदा कांड और राजनीतिक मोड़

सारदा चिटफंड घोटाले के बाद बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। राजनीतिक दबावों और आरोपों के बीच मुकुल रॉय ने तृणमूल कांग्रेस से दूरी बनाकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा।

हालांकि यह बदलाव स्थायी नहीं रहा। कहा जाता है कि वे मन से हमेशा तृणमूल से जुड़े रहे। अंततः उन्होंने अपनी मूल राजनीतिक जमीन पर वापसी की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि राजनीति केवल दल बदल का खेल नहीं, बल्कि विचार और भावनाओं की भी यात्रा है।

दोस्ती, जिम्मेदारी और समय की दूरी

मंत्रालय और संगठन की बढ़ती जिम्मेदारियों के साथ समय की कमी भी बढ़ी। मित्रों और सहयोगियों से मुलाकातें कम होती गईं। “दोस्ती में जिम्मेदारी बैरी बन गई”—यह पंक्ति उनके जीवन की व्यस्तता और संबंधों की दूरी को दर्शाती है।

इसके बावजूद, जिनसे उन्होंने एक बार भरोसे का रिश्ता बनाया, उसे अंत तक निभाने का प्रयास किया।

एक रणनीतिकार की विरासत

17 अप्रैल 1954 को जन्मे मुकुल रॉय की राजनीतिक यात्रा उतार-चढ़ाव से भरी रही—स्थापना, विस्तार, विवाद, दल-बदल और वापसी। लेकिन उनकी पहचान एक कुशल रणनीतिकार, संगठन निर्माता और राजनीतिक मार्गदर्शक के रूप में बनी रही।

  • संगठन निर्माण में अद्वितीय योगदान
  • चुनावी रणनीति में महारत
  • राजनीतिक संवाद की मजबूत शैली
  • विश्वास आधारित संबंध

निष्कर्ष

मुकुल रॉय का निधन बंगाल की राजनीति के एक युग का अंत है। उन्होंने राजनीति को केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि रणनीति, संबंध और संगठन का विज्ञान बनाया। “बंगाल का चाणक्य” भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी राजनीतिक सूझबूझ, नेतृत्व शैली और संगठनात्मक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

👉 राजनीति, विश्लेषण और राष्ट्रीय खबरों के लिए हमारे व्हाट्सएप्प चैनल को फॉलो करें – Web Varta

ये भी पढ़ें: आप मेरे मुंह में शब्द मत डालें’, ममता बनर्जी के लिए दलील देते हुए कपिल सिब्बल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

Author

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest

spot_img
spot_img

More articles

spot_img
spot_img