Tuesday, February 24, 2026
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यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 में मजबूत भागीदारी, नेट-जीरो और ESG नेतृत्व को मिला नया आयाम

मुंबई, बिजनेस डेस्क | वेब वार्ता

देश के अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 23 फरवरी 2026 को मुंबई स्थित जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर, बीकेसी में आयोजित मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 में सक्रिय भागीदारी करते हुए जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया। यह आयोजन ग्लोबल साउथ के शहरों के नेतृत्व में जलवायु कार्रवाई को तेज करने का एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।

इस अवसर पर बैंक ने जलवायु जोखिम प्रबंधन, कम कार्बन अर्थव्यवस्था और हरित वित्तपोषण से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों, कार्यक्रमों और पहलों का अनावरण किया, जिससे भारत के वित्तीय क्षेत्र में सस्टेनेबल फाइनेंस को नई दिशा मिली है।

तीन प्रमुख लीडरशिप दस्तावेजों का अनावरण

मुंबई क्लाइमेट वीक के दौरान यूनियन बैंक ने प्रमुख थिंक टैंकों के सहयोग से विकसित तीन महत्वपूर्ण लीडरशिप डॉक्यूमेंट जारी किए, जिनका उद्देश्य उद्योगों की जलवायु महत्वाकांक्षाओं को निवेश योग्य परियोजनाओं में बदलना है।

दस्तावेजसहयोगी संस्थामुख्य उद्देश्य
इस्पात एवं सीमेंट क्षेत्र में कार्बन कटौतीGIZ (जर्मन एजेंसी)कम कार्बन तकनीक व वित्तपोषण
जलवायु परिदृश्य मॉडलिंगCEEWजलवायु जोखिम विश्लेषण
नेट-जीरो रोडमैपErnst & Young2035 नेट-जीरो लक्ष्य

इन दस्तावेजों में तकनीकी समाधान, नीति समर्थन, वित्तीय संरचना और क्रियान्वयन रणनीति को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है, जिससे उद्योगों को हरित परिवर्तन में मदद मिलेगी।

जलवायु मॉडलिंग से जोखिम प्रबंधन को नई दिशा

सीईईडबल्यू के साथ विकसित जलवायु परिदृश्य मॉडलिंग दस्तावेज में जीसीएएम (Global Change Analysis Model) के माध्यम से भारत-विशिष्ट जलवायु परिदृश्यों का विश्लेषण किया गया है।

इसका उपयोग—

  • जलवायु जोखिम मूल्यांकन
  • ऋण पोर्टफोलियो सुरक्षा
  • ग्रीन इन्वेस्टमेंट योजना
  • ट्रांजिशन फाइनेंस

जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा, जिससे बैंकिंग क्षेत्र अधिक सतर्क और दूरदर्शी बन सके।

2035 नेट-जीरो लक्ष्य की ठोस कार्ययोजना

ई एंड वाई के सहयोग से विकसित नेट-जीरो रोडमैप में बैंक ने अपने स्कोप-1 और स्कोप-2 उत्सर्जन को 2035 तक शून्य करने की स्पष्ट रणनीति प्रस्तुत की है।

इस रोडमैप में—

  • ऊर्जा दक्ष भवन
  • ग्रीन आईटी सिस्टम
  • नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग
  • डिजिटल बैंकिंग विस्तार

जैसे उपायों को शामिल किया गया है।

ESG सर्टिफिकेशन से क्षमता निर्माण

यूनियन बैंक ने Climate Policy Initiative (CPI) के सहयोग से “भारतीय बैंकों के लिए ESG प्रमाणन कार्यक्रम” की शुरुआत की।

यह कार्यक्रम बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को—

  • ESG जोखिम प्रबंधन
  • ग्रीन फाइनेंसिंग
  • सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट
  • रिपोर्टिंग मानकों

में प्रशिक्षित करेगा।

यूनियन बैंक जलवायु संवाद का आयोजन

कार्यक्रम के दौरान “यूनियन बैंक जलवायु संवाद” का आयोजन किया गया, जिसमें उद्योग, नियामक, निवेशक, रेटिंग एजेंसियां और विशेषज्ञ शामिल हुए।

संवाद में निम्न विषयों पर गहन चर्चा हुई—

  • कम कार्बन तकनीक
  • डेटा उपलब्धता की चुनौतियां
  • नीतिगत समर्थन
  • ग्रीन बॉन्ड व ट्रांजिशन फंडिंग

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग से बढ़ा बैंक का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान यूनियन बैंक को ESG क्षेत्र में मिले नए सम्मान की भी घोषणा की गई।

रेटिंग एजेंसीसम्मानमहत्व
CARE EdgeESG 1+उत्कृष्ट नेतृत्व
Moody’sSQS2उच्च संवहनीय गुणवत्ता

ये रेटिंग्स बैंक की जिम्मेदार वित्तपोषण नीति और दीर्घकालिक स्थिरता को दर्शाती हैं।

निम्न-कार्बन भारत के निर्माण में बैंक की भूमिका

यूनियन बैंक ने स्पष्ट किया कि वह भारत के निम्न-कार्बन परिवर्तन को वित्तीय समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

सुदृढ़ ESG शासन, वैश्विक मानकों, साझेदारी और ज्ञान नेटवर्क के माध्यम से बैंक ग्राहकों, निवेशकों और समाज के लिए स्थायी मूल्य का सृजन करता रहेगा।

निष्कर्ष

मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बैंक केवल वित्तीय संस्थान नहीं, बल्कि हरित परिवर्तन का प्रमुख भागीदार बन चुका है। दस्तावेजों, प्रशिक्षण, संवाद और अंतरराष्ट्रीय रेटिंग्स के माध्यम से बैंक ने भारत के सतत विकास लक्ष्य को मजबूत आधार प्रदान किया है।

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ये भी पढ़ें: यूनियन बैंक को मूडीज़ से मिली “बहुत अच्छी संवहनीयता गुणवत्ता” रेटिंग

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