Monday, February 23, 2026
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हरदोई: 5 साल की मासूम की बहादुरी—200 मीटर दौड़कर थाने पहुंची, बचाई मां की जान

हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता

हरदोई जिले के कोतवाली शहर क्षेत्र स्थित नुमाइश पुरवा से एक दिल दहला देने वाली, लेकिन बेहद प्रेरणादायक घटना सामने आई है। यहां महज 5 वर्षीय मासूम बच्ची ने अद्भुत साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए करीब 200 मीटर दौड़कर थाने पहुंचकर अपनी मां पूजा श्रीवास्तव की जान बचा ली। बच्ची की बहादुरी से समय रहते पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को हमलावरों से सुरक्षित बाहर निकाला।

घर में घुसकर महिला पर किया गया हमला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूजा श्रीवास्तव अपने घर में मौजूद थीं, तभी कुछ लोग अचानक घर में घुस आए और उन पर हमला कर दिया। आरोपियों ने महिला को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई।

इस भयावह दृश्य को देखकर बच्ची घबरा जरूर गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़ी।

200 मीटर दौड़कर पहुंची थाने

मासूम बच्ची घर से निकलकर रोते-बिलखते हुए करीब 200 मीटर दूर स्थित कोतवाली तक पहुंची और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों से अपनी मां को बचाने की गुहार लगाई।

बताया गया कि हमलावरों ने बच्ची को रोकने के लिए पीछे पालतू कुत्ता भी छोड़ दिया, लेकिन वह बिना डरे थाने तक पहुंच गई।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बचाई जान

बच्ची की हालत और बात सुनते ही पुलिस टीम सतर्क हो गई। अनहोनी की आशंका को भांपते हुए पुलिस तत्काल बच्ची को साथ लेकर मौके पर पहुंची।

पुलिस ने महिला को हमलावरों के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाला और मौके से आरोपियों को हिरासत में ले लिया।

संपत्ति विवाद बना हमले की वजह

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मामला पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा हुआ है। पीड़िता का आरोप है कि संपत्ति पर कब्जे को लेकर पहले भी विवाद चल रहा था, इसी रंजिश में हमला किया गया।

मासूम की बहादुरी बनी मिसाल

इस घटना ने यह साबित कर दिया कि साहस उम्र का मोहताज नहीं होता। छोटी सी बच्ची ने जिस सूझबूझ और हिम्मत से काम लिया, उसने न सिर्फ अपनी मां की जान बचाई बल्कि पूरे इलाके में सराहना का विषय बन गई।

  • 5 साल की बच्ची ने दिखाई अद्भुत बहादुरी
  • 200 मीटर दौड़कर पहुंची थाने
  • पुलिस की तत्परता से बची महिला की जान
  • संपत्ति विवाद से जुड़ा मामला

निष्कर्ष

नुमाइश पुरवा की यह घटना न केवल पारिवारिक विवाद की गंभीरता को दर्शाती है, बल्कि एक मासूम बच्ची की असाधारण हिम्मत और समझदारी का उदाहरण भी है। समय पर लिए गए उसके फैसले ने एक मां को नई जिंदगी दी है।

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