नई दिल्ली, नेशनल डेस्क | वेब वार्ता
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग की सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों की तैनाती का निर्देश दिया है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सटीक और अद्यतन मतदाता सूची अत्यंत आवश्यक है और इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
यह आदेश उस समय आया है जब राज्य में मतदाता सूची संशोधन को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठ रहे थे। अब सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से SIR प्रक्रिया को अतिरिक्त न्यायिक निगरानी और संस्थागत मजबूती मिलने जा रही है।
क्या है मामला और क्यों महत्वपूर्ण है SIR?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन करना है। इस प्रक्रिया के तहत —
- फर्जी और दोहराए गए नाम हटाए जाते हैं
- मृत मतदाताओं के नाम विलोपित किए जाते हैं
- पते में परिवर्तन का अद्यतन किया जाता है
- नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा जाता है
अदालत ने कहा कि स्वच्छ और विश्वसनीय मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला है। यदि सूची में त्रुटियां रहती हैं तो चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
तीन सदस्यीय पीठ के निर्देश
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने राज्य में SIR प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए कई निर्देश जारी किए। पीठ ने कहा कि पुनरीक्षण कार्य में न्यायिक अनुभव और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सेवारत जिला न्यायाधीशों के साथ-साथ पूर्व न्यायाधीशों की सेवाएं भी ली जाएं।
अदालत ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे आवश्यक न्यायिक अधिकारियों को उपलब्ध कराएं, ताकि निर्वाचन आयोग को पर्याप्त संस्थागत सहयोग मिल सके।
राज्य सरकार की भूमिका पर टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त ‘ए’ श्रेणी के अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित न करने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने स्पष्ट किया कि इतनी व्यापक प्रशासनिक प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए पूर्ण प्रशासनिक सहयोग अनिवार्य है।
न्यायालय ने कहा कि यदि संबंधित विभाग समय पर संसाधन उपलब्ध नहीं कराते, तो इससे पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी तक ड्राफ्ट सूची प्रकाशित करने की अनुमति
शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी 2026 तक राज्य की मतदाताओं की मसौदा सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी है। इसके साथ ही आयोग को आवश्यकतानुसार बाद में पूरक सूची (Supplementary Lists) जारी करने की भी छूट दी गई है।
इस कदम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रह जाए और आपत्तियों एवं दावों का निपटान विधिसम्मत तरीके से किया जा सके।
सुरक्षा और समन्वय के लिए विशेष निर्देश
पीठ ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि SIR कार्य में तैनात न्यायिक अधिकारियों को पूर्ण सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया जाए।
इसके अतिरिक्त, अदालत ने 21 फरवरी तक सभी प्रमुख हितधारकों — मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी — की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है, ताकि समन्वित रणनीति के साथ प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
मुख्य तथ्य एक नजर में
| विषय | विवरण |
|---|---|
| मामला | पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया |
| निर्देश जारी | सुप्रीम कोर्ट |
| तैनाती | सेवारत व पूर्व जिला न्यायाधीश |
| ड्राफ्ट सूची | 28 फरवरी 2026 तक |
| उद्देश्य | पारदर्शी और अद्यतन मतदाता सूची |
लोकतांत्रिक व्यवस्था पर संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश से राज्य में आगामी चुनावों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता मजबूत होगी। न्यायिक अधिकारियों की भागीदारी से प्रक्रिया में निष्पक्षता का स्तर बढ़ेगा और राजनीतिक विवादों की गुंजाइश कम होगी।
मतदाता सूची को लेकर अक्सर उठने वाले विवाद, जैसे नामों का गायब होना या दोहराव, अब अधिक व्यवस्थित ढंग से सुलझाए जा सकेंगे।
निष्कर्ष
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों की तैनाती से पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।
आगामी दिनों में ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन और आपत्तियों के निस्तारण के साथ यह स्पष्ट होगा कि यह न्यायिक हस्तक्षेप चुनावी प्रणाली को कितनी मजबूती प्रदान करता है।
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