कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गोस्वामी तुलसी दास इंटर कॉलेज के 700 व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को इंटरमीडिएट परीक्षा से वंचित किए जाने के मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। कॉलेज के प्रधान लिपिक ज्ञान प्रकाश पाठक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
साथ ही नोडल अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति करते हुए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद को पत्र भेजा गया है।
डीआईओएस की संस्तुति पर हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई तब की गई, जब जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्ता ने माध्यमिक शिक्षा परिषद से प्राप्त निर्देशों के आधार पर प्रधान लिपिक के निलंबन की संस्तुति की।
इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल निलंबन का निर्णय लिया।
पंजीकरण में अनियमितता के आरोप
कॉलेज के प्रबंधक पवन उपाध्याय ने बताया कि प्रधान लिपिक पर इंटरमीडिएट परीक्षा-2026 के पत्राचार एवं पंजीकरण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता और नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं।
उन्होंने कहा कि यह कृत्य कर्तव्यहीनता एवं सेवा आचरण के प्रतिकूल है, जिससे शैक्षिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
जांच समिति का गठन
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए प्रबंध समिति द्वारा प्रधान लिपिक के विरुद्ध जांच समिति का गठन भी किया गया है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।
हाईकोर्ट में भी पहुंचा मामला
बताया गया कि इस प्रकरण को लेकर विद्यालय प्रबंधन द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका संख्या 6742-2026 दाखिल की गई थी।
17 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति विवेक शरण ने कोई अंतरिम राहत नहीं दी और बोर्ड को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।
मामले से शिक्षा व्यवस्था पर असर
700 छात्रों के परीक्षा से वंचित होने की घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्य बिंदुओं का सार
| विषय | विवरण |
|---|---|
| मामला | 700 परीक्षार्थी परीक्षा से वंचित |
| कार्रवाई | प्रधान लिपिक निलंबित |
| अधिकारी | ज्ञान प्रकाश पाठक |
| सिफारिश | नोडल अधिकारी पर कार्रवाई |
| हाईकोर्ट आदेश | 4 सप्ताह में जवाब |
| परीक्षा वर्ष | इंटरमीडिएट 2026 |
निष्कर्ष
कुशीनगर में सामने आए इस मामले ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर किया है। प्रशासन द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई से छात्रों के हितों की रक्षा की उम्मीद जताई जा रही है।
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